KIREN RIJIJU RAHUL GANDHI--मॉनसून सत्र के दौरान संसद में हुए हंगामे को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष और राहुल गांधी पर तीखा निशाना साधा है। रिजिजू ने आरोप लगाया कि विपक्ष संसद की कार्यवाही रोकने के बाद लोकतंत्र पर सवाल उठाता है। उन्होंने कहा कि संसद सरकार या विपक्ष की नहीं, बल्कि देश की जनता की है। राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए रिजिजू ने कहा कि विदेशों में भारत के लोकतंत्र की शिकायत करने वाले नेताओं को संसद के भीतर जवाबदेही का सामना करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।
संसद में हंगामे को लेकर विपक्ष पर सवाल
किरेन रिजिजू ने कहा कि संसद में सरकार और विपक्ष दोनों की भूमिका जरूरी है, लेकिन सदन को बार-बार बाधित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सही नहीं है। उन्होंने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद में प्रश्नकाल न चलने देना, मंत्रियों की बात नहीं सुनना और बहस के प्रस्तावों को ठुकराने के बाद यह कहना कि सदन में चर्चा नहीं हो रही, विरोधाभासी है। रिजिजू ने इसे ऐसी स्थिति बताया, जिसमें पहले बहस का रास्ता रोका जाए और बाद में उसी स्थिति के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाए। उनका कहना था कि संसद का इस्तेमाल बहस और जनता के मुद्दों पर चर्चा के लिए होना चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव बनाने के लिए।
सदन की कार्यवाही के आंकड़ों पर भी घेरा
रिजिजू ने मॉनसून सत्र की कार्यवाही को लेकर सामने आए आंकड़ों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा निर्धारित समय के मुकाबले करीब 15 प्रतिशत और राज्यसभा करीब 33 प्रतिशत ही चल पाई। उनके मुताबिक इन आंकड़ों को केवल सरकार की कार्यप्रणाली से जोड़कर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि सदन में बार-बार व्यवधान के कारण कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। कई मौकों पर बैठक शुरू होने के कुछ ही समय बाद सदन को स्थगित करना पड़ा। रिजिजू ने आरोप लगाया कि विपक्ष की रणनीति पहले सदन की कार्यवाही को बाधित करने और फिर बर्बाद हुए समय को सरकार के खिलाफ मुद्दा बनाने की रही।
जंतर-मंतर मामले पर भी राहुल गांधी को घेरा
जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामले को लेकर भी रिजिजू ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा का प्रस्ताव दिया था। रिजिजू के मुताबिक चर्चा दोपहर 3 बजे से अगले दिन 3 बजे तक चलाने और उठाए गए सवालों का जवाब देने की बात कही गई थी, लेकिन राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। रिजिजू ने सवाल उठाया कि जब जवाब देने के लिए संसद में चर्चा का मंच उपलब्ध कराया जा रहा हो, तो उस मंच को ही ठुकराने के बाद जवाब न मिलने की शिकायत कैसे की जा सकती है।
राहुल गांधी की संसद में मौजूदगी पर उठाया सवाल
राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए रिजिजू ने उनके संसदीय रिकॉर्ड का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 17वीं लोकसभा के दौरान राहुल गांधी की सदन में उपस्थिति 51 प्रतिशत रही थी। इसके बावजूद अगर वह सरकार पर लोकतंत्र खत्म करने का आरोप लगाते हैं तो इस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। रिजिजू ने कहा कि जो नेता 24 घंटे की बहस के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता, उसे बाद में यह शिकायत नहीं करनी चाहिए कि उसे बोलने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया।
विदेशों में लोकतंत्र पर सवाल को लेकर तीखा हमला
रिजिजू ने राहुल गांधी के विदेश दौरों का जिक्र करते हुए कहा कि वह यूके, जर्मनी और अमेरिका जाकर भारत में लोकतंत्र की स्थिति पर सवाल उठाते हैं, लेकिन संसद के भीतर जवाबदेही तय करने के लिए मौजूद रहने की जरूरत है। उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि संसद में आकर सवालों का सामना करने और बहस में हिस्सा लेने की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। रिजिजू ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की बहादुरी कैमरों और विदेशी दर्शकों के सामने ज्यादा दिखाई देती है। संसद के मॉनसून सत्र में हुए हंगामे को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक टकराव के बीच रिजिजू की यह टिप्पणी अब सियासी बहस को और तेज कर सकती है।