4 अगस्त को महान गायक, अभिनेता और संगीतकार किशोर कुमार का जन्मदिवस है। इस मौके पर मध्य प्रदेश सरकार उनके शहर खंडवा में ‘गौरव दिवस’ मना रही है। लेकिन इस उत्सव के बीच एक मांग फिर से मुखर हो गई है—किशोर कुमार के पुश्तैनी मकान को स्मारक का दर्जा देने की। देशभर से खंडवा पहुंचने वाले फैंस और स्थानीय कलाकारों का कहना है कि यह सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि संगीत प्रेमियों के लिए मंदिर है। सरकार को इसे सहेजकर एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संरक्षित करना चाहिए।
खंडवा की मांग: किशोर कुमार का घर बने संगीत स्मारक
खंडवा स्थित किशोर कुमार का पुश्तैनी मकान इस वक्त जर्जर स्थिति में है। हर साल उनके जन्मदिवस पर हजारों की संख्या में संगीतप्रेमी यहां आते हैं, लेकिन घर की हालत देख निराश भी होते हैं। प्रशंसकों का कहना है कि यह मकान केवल ईंट-पत्थरों का नहीं, बल्कि एक युग की सांस्कृतिक पहचान है।
पाकिस्तान की मिसाल, भारत में क्यों नहीं?
किशोर प्रेमियों ने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां राज कपूर और दिलीप कुमार के घर को सरकार ने स्मारक बनाया है। ऐसे में भारत में किशोर कुमार जैसे अद्भुत कलाकार के घर को सरकार संरक्षित क्यों नहीं कर रही? लोगों का मानना है कि यह मकान एक प्रेरणा स्थल बन सकता है, जहां आने वाली पीढ़ियां उनके जीवन और संगीत से रूबरू हो सकें।
सरकारी प्रतिक्रिया और उत्तराधिकारी की सहमति
खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने कहा कि किशोर कुमार के उत्तराधिकारियों से इस संबंध में बातचीत हुई है। यदि वे इस संपत्ति को सरकार को सौंपने के लिए तैयार होते हैं, तो यहां एक सुंदर और प्रेरणादायक स्मारक बनाया जा सकता है। इससे न केवल खंडवा की पहचान और मजबूत होगी, बल्कि संगीत के इतिहास में भी एक महत्वपूर्ण पन्ना जुड़ जाएगा।
किशोर के फैंस बोले: यह सिर्फ मकान नहीं, संगीत का मंदिर है
स्थानीय संगीत प्रेमियों का कहना है कि किशोर कुमार उनके लिए सिर्फ गायक नहीं, बल्कि संगीत के देवता हैं। उनका घर किसी तीर्थ से कम नहीं। इस मकान को सहेजकर न सिर्फ किशोर कुमार की विरासत को सम्मान दिया जा सकता है, बल्कि खंडवा को भी देश के सांस्कृतिक मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान मिल सकता है।