History Of Bathing: शरीर से पसीना, गंदगी और बैक्टीरिया हटाने के लिए रोजाना नहाना बेहद जरूरी होता है। नहाने से ताजगी, अच्छी नींद और मानसिक शांति, स्वस्थ त्वचा और संक्रमण का खतरा कम होता है। लेकिन जब कड़ाके की ठंड पड़ती है, तो पानी छूने से भी डर लगने लगता है। ऐसी स्थिति में कई लोग रोज नहाने से कतराते हैं और हफ्तों तक बिना नहाए रह जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है नहाने की परंपरा आखिर शुरू कहां से हुई थी। तो आइए आज इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि नहाने की परंपरा कहां से शुरू हुई थी।
नहाने की परंपरा बहुत पुरानी है
आपको बता दें कि नहाने की परंपरा बहुत पुरानी है, जो पाषाण युग से शुरू हुई, जब लोग प्राकृतिक झरनों के पास रहते थे, लेकिन कांस्य युग (लगभग 5000 साल पहले) तक यह एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान बन गई।सिंधु घाटी सभ्यता में बने विशाल स्नानागार इस बात का प्रमाण हैं कि ईसा पूर्व 2500 के आसपास भी सामूहिक स्नान और स्वच्छता को महत्व दिया जाता था।
भारतीय परंपरा में स्नान को धार्मिक कर्म से जोड़ा गया
इस परंपरा का सबसे पुराना उदाहरण मोहन जोदड़ो का ग्रेट बाथ माना जाता है। वहीं भारतीय परंपरा में स्नान को धार्मिक कर्म से जोड़ा गया। गंगा, यमुना जैसे पवित्र नदियों में स्नान को पवित्र माना गया। तो वहीं, आयुर्वेद में भी स्नान को शरीर, मन और आत्मा के संतुलन के लिए जरूरी बताया गया है। सुबह स्नान करने की परपंरा को स्वास्थ्यवर्धक माना गया।
गंध छिपाने के लिए इत्र और खुशबूदार तेलों का उपयोग करते
वहीं, मध्यकाल आते-आते यूरोप में नहाने की आदत कम हो गई। क्योंकि यह धारणा फैल गई थी कि बार-बार नहाने से शरीर कमजोर होता है और बीमारियां फैलती हैं। ठंडे मौसम, सीमित जल संसाधन और गर्म पानी की कमी के कारण लोग सर्दियों में हफ्तों तक नहीं नहाते थे। शरीर की गंध छिपाने के लिए इत्र और खुशबूदार तेलों का उपयोग करते हैं। कई बार आज भी लोग ऐसा करते हैं।
नहाने से परहेज करने के वैज्ञानिक कारण
आपको बता दें कि सर्दियों में हफ्तों तक न नहाने की पीछे सिर्फ परंपरा नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण भी था। ठंड में शरीर की त्वचा प्राकृतिक तेल छोड़ती है, जो शरीर को गर्म रखने में मदद करता है। बार-बार नहाने से यह परत हट जाती है, जिससे त्वचा रूखी होती है और ठंड जल्दी लगती है। पुराने समय में हीटर और गर्म पानी की सुविधा न होने के कारण लोग बीमारियों से बचने के लिए नहाना टालते थे।
नहाना स्वास्थ्य का अहम हिस्सा बन गया
वहीं, 20वीं सदी की शुरुआत, स्वच्छता के प्रति बढ़ती जागरूकता और औद्योगिक क्रांति और आधुनिक प्लंबिंग सिस्टम के बाद रोजाना नियमित स्नान करना आम हो गया है, जो आज एक दैनिक अपेक्षा है। आज के समय में गर्म पानी की उपलब्धता, साबुन के उपयोग ने रोज नहाने को सामान्य बना दिया है। नहाना स्वास्थ्य का अहम हिस्सा बन गया।