
भारतीय संस्कृति में बड़ों के चरण स्पर्श को सम्मान, संस्कार और विनम्रता का प्रतीक माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि जब हम आदर भाव से किसी योग्य व्यक्ति के चरण स्पर्श करते हैं, तो उनके आशीर्वाद से हमारे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। लेकिन शास्त्रों में यह भी स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि सभी के पैर छूना पुण्य नहीं होता। कुछ विशेष स्थितियों और व्यक्तियों के चरण स्पर्श करना वर्जित माना गया है, क्योंकि इससे पुण्य की जगह पाप का भागी बनना पड़ सकता है। ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि किन लोगों के पैर छूने से बचना चाहिए।
क्या कहते हैं शास्त्र
शास्त्रों के अनुसार, नशे में धुत व्यक्ति, पापी, चरित्रहीन, अपराधी, और छल-कपट करने वाले लोगों के चरण स्पर्श नहीं करने चाहिए। इन लोगों की जीवनशैली और कर्म नकारात्मक ऊर्जा से भरे होते हैं। जब हम ऐसे लोगों के चरण छूते हैं, तो अनजाने में उनके कर्मों का असर हमारे जीवन पर भी पड़ सकता है। यह केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी सही है — क्योंकि जिनके विचार और कर्म दूषित हैं, उनके संपर्क में आकर हम भी भ्रमित और प्रभावित हो सकते हैं।
ये रखें विशेश रूप से ध्यान
इसी तरह, अहंकारी और घमंडी व्यक्ति का भी चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए। चरण स्पर्श का उद्देश्य विनम्रता दिखाना होता है, लेकिन जब सामने वाला व्यक्ति उस आदर का दुरुपयोग करता है, तो यह कर्म व्यर्थ हो जाता है। संत-महात्मा, गुरु, माता-पिता और सच्चे ज्ञानियों के चरण स्पर्श से ही वास्तविक पुण्य प्राप्त होता है, क्योंकि वे अपने आचरण और विचारों से हमें जीवन में दिशा दिखाते हैं।हमें यह समझना चाहिए कि चरण स्पर्श केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक क्रिया है, जो सही व्यक्ति के प्रति की जाए तो वह जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है। इसलिए शास्त्रों में यह सावधानीपूर्वक बताया गया है कि किनके चरणों में सिर नवाना है और किनसे दूरी बनाए रखना है। इसलिए अगली बार जब आप किसी के चरण स्पर्श करने जाएं, तो केवल उम्र नहीं, बल्कि उसके कर्म, चरित्र और विचारों को भी ध्यान में रखें — ताकि आपका श्रद्धा भाव आपको पुण्य की राह पर ही ले जाए।