Narendra Modi ने Mahavir Jayanti के पावन अवसर पर Koba Tirth से देशवासियों को संदेश देते हुए भारतीय संस्कृति, आध्यात्म और आधुनिक विकास के समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने जैन परंपरा के मूल्यों को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए कहा कि सेवा, संयम और संस्कार ही विकसित भारत की दिशा तय करेंगे।
आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर कोबा तीर्थ
प्रधानमंत्री ने कोबा तीर्थ की पवित्रता और आध्यात्मिक वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि यह स्थान केवल पूजा का केंद्र नहीं, बल्कि साधना और ज्ञान का संगम है। यहां की ऊर्जा व्यक्ति को आत्मचिंतन और सेवा के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि जहां संतों और मुनियों की तपस्या जुड़ी होती है, वहां समाज के लिए सकारात्मक बदलाव स्वतः जन्म लेते हैं।
सम्राट संप्रति से मिली अहिंसा की प्रेरणा
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने प्राचीन शासक सम्राट संप्रति का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सत्ता को सेवा का माध्यम बनाया। जहां कई शासकों ने हिंसा का रास्ता चुना, वहीं संप्रति ने अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह के जरिए समाज को नई दिशा दी। यह उदाहरण आज भी शासन और समाज दोनों के लिए प्रेरणादायक है।
‘सबका साथ, सबका विकास’ की पुनर्पुष्टि
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में अब राजनीति की पुरानी सोच बदल चुकी है। पहले निर्णय वोट बैंक और परिवारवाद के इर्द-गिर्द घूमते थे, लेकिन अब सरकार “सबका साथ, सबका विकास” के मंत्र पर काम कर रही है। उन्होंने इसे विकसित भारत के लक्ष्य की आत्मा बताते हुए कहा कि हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ना ही असली प्रगति है।
संस्कृति और तकनीक का संगम
पीएम मोदी ने अपने कार्यक्रम को “जड़ों से जुड़ने और दुनिया से जुड़ने” का सफर बताया। एक ओर जहां उन्होंने सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की बात की, वहीं दूसरी ओर आधुनिक तकनीक जैसे सेमीकंडक्टर निर्माण को भारत के भविष्य का आधार बताया। उन्होंने कहा कि यही संतुलन भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाएगा।
नव संकल्पों से समाज को दिशा
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने नागरिकों को कई संकल्पों की याद दिलाई। इनमें जल संरक्षण, स्वच्छता, प्राकृतिक खेती, फिटनेस, योग, गरीबों की मदद और देश भ्रमण जैसे विषय शामिल रहे। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे व्यक्तिगत प्रयास मिलकर राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।