
कोटिलिंगेश्वर मंदिर: भारत में ऐसे कई मंदिर हैं जो आस्था, संस्कृति और रहस्य से भरपूर हैं, लेकिन कर्नाटक के कोलार जिले में स्थित कोटिलिंगेश्वर मंदिर अपनी अनूठी पहचान के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यह मंदिर न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व में अपनी तरह का एकमात्र ऐसा तीर्थस्थल है जहां 1 करोड़ (कोटि) से अधिक शिवलिंग स्थापित करने का संकल्प लिया गया है।
1980 में की गई थी स्थापना
इस मंदिर की स्थापना स्वामी संबाशिव द्वारा वर्ष 1980 में की गई थी। उन्होंने शिवभक्ति के प्रचार-प्रसार के लिए इस दिव्य प्रकल्प की शुरुआत की, जिसमें हर श्रद्धालु को एक शिवलिंग स्थापित करने का अवसर मिलता है। आज मंदिर परिसर में लगभग 90 लाख शिवलिंग स्थापित हो चुके हैं, और यह संख्या प्रतिवर्ष बढ़ रही है।
108 फिट ऊंचा शिवलिंग
मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण है यहां स्थित 108 फीट ऊंचा शिवलिंग, जो एशिया में सबसे ऊंचे शिवलिंगों में से एक माना जाता है। इसके समक्ष 35 फीट ऊंची नंदी (बैल) की मूर्ति है, जो शिव के वाहन के रूप में पूजी जाती है। मंदिर का पूरा परिसर लगभग 15 एकड़ भूमि में फैला हुआ है, जिसमें छोटे-बड़े आकार के लाखों शिवलिंग प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थापित हैं।
क्या है श्रद्धालुओं की मान्यता
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना करने से जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं। यह स्थान पापों से मुक्ति, मनोकामना पूर्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत फलदायक माना जाता है। हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों भक्त एकत्र होते हैं और पूरी रात भजन, पूजन और ध्यान के माध्यम से शिव को स्मरण करते हैं।कोटिलिंगेश्वर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा और एकता का प्रतीक बन चुका है। यहां आकर हर कोई यह अनुभव करता है कि शिव सिर्फ एक देव नहीं, बल्कि एक चेतना हैं – जो हर लिंग में व्याप्त होकर हमें अपने भीतर की दिव्यता से जोड़ते हैं।