मध्यप्रदेश के ग्वालियर की बेटी कृष्णा शर्मा ने अपनी मेहनत और खेल प्रतिभा के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद उनका चयन भारतीय अंडर-21 महिला हॉकी टीम में हुआ है। अब वह यूनाइटेड किंगडम दौरे पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। साधारण परिवार से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची कृष्णा की यह यात्रा संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प की मिसाल बनकर सामने आई है।
यूनाइटेड किंगडम दौरे पर दिखाएंगी अपना खेल
भारतीय अंडर-21 महिला हॉकी टीम के लिए चुनी गई कृष्णा शर्मा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए तैयार हैं। टीम 5 जुलाई से यूनाइटेड किंगडम दौरे पर जाएगी, जहां स्कॉटलैंड, इंग्लैंड, अमेरिका और बेल्जियम की जूनियर टीमों के खिलाफ टेस्ट मुकाबले खेले जाएंगे। यह दौरा युवा खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने का बड़ा मंच माना जा रहा है।
संघर्षों के बीच तैयार हुई सफलता की कहानी
कृष्णा शर्मा का सफर केवल खेल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सामाजिक चुनौतियां भी शामिल रहीं। हॉकी खेलने के दौरान स्कर्ट पहनने को लेकर उन्हें कई तरह की टिप्पणियों और तानों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने किसी भी नकारात्मक बात को अपने लक्ष्य के बीच नहीं आने दिया। उन्होंने जवाब शब्दों से नहीं बल्कि मैदान पर अपने प्रदर्शन से दिया।
परिवार बना सबसे मजबूत सहारा
कृष्णा के पिता सुनील शर्मा सिक्योरिटी सर्विस कंपनी का संचालन करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी के सपनों को कभी रुकने नहीं दिया। परिवार का सहयोग और विश्वास कृष्णा के खेल जीवन में लगातार ताकत बनकर खड़ा रहा। यही कारण है कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाना जारी रखा।
अकादमी से राष्ट्रीय मंच तक का सफर
कृष्णा ने साल 2019 में मध्यप्रदेश महिला हॉकी अकादमी से अपने खेल करियर की शुरुआत की थी। लगातार अभ्यास और कोचों के मार्गदर्शन ने उनके खेल को नई दिशा दी। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई पदक हासिल किए और कई बार व्यक्तिगत प्रदर्शन के लिए सम्मानित भी हुईं।
उपलब्धियों ने बनाई अलग पहचान
पिछले कुछ वर्षों में कृष्णा ने कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी अलग पहचान बनाई है। सिल्वर और गोल्ड मेडल जीतने के साथ-साथ कई प्रतियोगिताओं में वह सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुनी गईं। अब भारतीय टीम की जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय मैदान में उतरना उनके खेल जीवन का बड़ा पड़ाव माना जा रहा है। ग्वालियर और मध्यप्रदेश के खेल जगत में उनकी उपलब्धि को गर्व के साथ देखा जा रहा है।