Dhanteras 2025: धनतेरस के शुभ अवसर पर उज्जैन में एक अनोखी और प्राचीन परंपरा निभाई जाएगी। श्रद्धालु बड़ी संख्या में सांदीपनि आश्रम और महाकालेश्वर मंदिर परिसर में पहुंचकर भगवान कुबेर की नाभि में इत्र अर्पित करेंगे। मान्यता है कि ऐसा करने से धन, ऐश्वर्य और सौभाग्य की वर्षा होती है। यह परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है और उज्जैन के साथ-साथ देशभर के कुबेर मंदिरों में बड़े श्रद्धा-भाव से निभाई जाती है।
कुबेर की नाभि में इत्र अर्पित करने की परंपरा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कुबेर भगवान शिव से धन के देवता का पद प्राप्त करने के बाद स्वयं बोले थे कि उनका उदर और नाभि धन का स्रोत बनेगा। तब देवताओं ने उनकी नाभि में इत्र और पुष्प अर्पित कर समृद्धि का आशीर्वाद मांगा था। उसी क्षण से यह परंपरा शुरू हुई कि कुबेर की नाभि में इत्र चढ़ाने से धन का स्थायित्व और शुभ संपत्ति की वृद्धि होती है। मंत्र “नाभी इत्रं समप्यत, लक्ष्मीकुबेर प्रसीदतु” के उच्चारण से यह पूजा पूर्ण होती है।
1100 वर्ष पुरानी परमारकालीन प्रतिमा
सांदीपनि आश्रम परिसर के श्री कुण्डेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित कुबेर प्रतिमा लगभग 1100 वर्ष पुरानी है। प्रतिमा में कुबेर बैठे हुए हैं, एक हाथ में सोम पात्र और दूसरे में वर मुद्रा है। पुरातत्वविदों के अनुसार यह प्रतिमा परमारकालीन काल की है, जो उस समय की शिल्पकला और ऐश्वर्य का जीवंत प्रमाण है। श्रद्धालु दीपावली से पहले यहां आकर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
श्रीकृष्ण और कुबेर से जुड़ी कथा
मान्यता है कि जब श्रीकृष्ण ने सांदीपनि आश्रम में अपनी शिक्षा पूर्ण की, तो गुरु दक्षिणा में कुबेर धन लेकर पहुंचे थे। परंतु गुरु सांदीपनि ने उसे लौटा दिया और श्रीकृष्ण को आदेश दिया कि वे शंखासुर से उनके पुत्र को मुक्त कराएं। इस कार्य के बाद गुरु-माता ने उन्हें ‘श्री’ का वरदान दिया, तभी वे ‘श्रीकृष्ण’ कहलाए। माना जाता है कि उसी समय कुबेर आश्रम में विराजमान हुए।
देश के प्रमुख कुबेर मंदिर
मंदसौर (म.प्र.): यहां की कुबेर प्रतिमा लगभग 1300 वर्ष पुरानी है, जिसमें वे नेवले पर सवार हैं।
ओंकारेश्वर (म.प्र.): यहां कुबेर देव ने कठोर तप कर शिवलिंग की स्थापना की थी।
वडोदरा (गुजरात): नर्मदा तट पर स्थित मंदिर लगभग 2500 वर्ष पुराना है।
जागेश्वर धाम (उत्तराखंड): कल्यूरी राजवंश के काल में निर्मित, यहां कुबेर की पूजा एकलिंग रूप में होती है।
काशी विश्वनाथ (वाराणसी): शिव के साथ विराजमान कुबेर वैभव और संपत्ति के रक्षक माने जाते हैं।