मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर उत्साह बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। भारत में जन्मी पहली भारतीय मादा चीता मुखी ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। यह उपलब्धि न केवल एमपी के लिए बल्कि देश के प्रोजेक्ट चीता के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है। मुखी वही शावक है जो 2022 में भीषण गर्मी में जन्मे चार शावकों में अकेली जीवित बची थी। अब उसी ने भारत में चीता प्रजनन की सफलता को नई दिशा दी है।
कूनो में बढ़ा चीतों का परिवार
कूनो नेशनल पार्क में लंबे समय से चल रहे चीता पुनर्वास अभियान को मुखी ने नई गति दी है। पांच शावकों के जन्म के साथ पार्क में चीतों की प्राकृतिक वृद्धि का सिलसिला मजबूत हुआ है।
33 महीने की मुखी बनी भारत की पहली ‘जन्मी और जनन करने वाली’ चीता
मुखी भारत में जन्मी पहली मादा चीता है, जिसने अब प्राकृतिक रूप से शावकों को भी जन्म दिया। यह संकेत है कि भारतीय वातावरण में चीतों का एडैप्टेशन सफल रहा है।
प्रोजेक्ट चीता को मिली बड़ी सफलता
विशेषज्ञों के अनुसार, प्राकृतिक प्रजनन से यह साबित होता है कि भारत में चीतों के दीर्घकालिक संरक्षण की संभावनाएं मजबूत हैं। यह कार्यक्रम आत्मनिर्भर चीता आबादी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मां और शावक दोनों स्वस्थ
वन विभाग के अनुसार, मुखी और उसके सभी पांचों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं। निगरानी टीमें लगातार इनके व्यवहार और स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं।
भारत के वाइल्डलाइफ़ कंजर्वेशन को मजबूत आधार
चीता मुखी द्वारा जन्मे शावक भविष्य में जेनेटिक विविधता और प्रजाति स्थिरता को मजबूती देंगे। इससे भारत में चीता संरक्षण मिशन को और गति मिलने की उम्मीद है।