मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में एक बार फिर इतिहास रचा गया है। बोत्सवाना से लाए गए 9 अफ्रीकी चीतों के आगमन के साथ भारत में इनकी कुल संख्या बढ़कर 48 हो गई है। ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत यह तीसरी बड़ी खेप है, जिसने देश में विलुप्त हो चुके इस राजसी वन्यजीव की वापसी को और मजबूती दी है।
बोत्सवाना से आया तीसरा बड़ा जत्था
शनिवार को बोत्सवाना से 9 चीते विशेष विमान के जरिए भारत पहुंचे। यह ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत तीसरा बड़ा ट्रांसलोकेशन अभियान है। इससे पहले 2022 में नामीबिया और 2023 में दक्षिण अफ्रीका से चीते लाए जा चुके हैं। नए जत्थे में 6 मादा और 3 नर चीते शामिल हैं। इनके आने से कूनो में चीतों की संख्या 45 हो गई है, जबकि देशभर में यह आंकड़ा 48 तक पहुंच गया है।
ग्वालियर एयरबेस से हेलीकॉप्टर द्वारा कूनो तक सफर
चीतों को पहले विशेष विमान से ग्वालियर एयरबेस लाया गया, जहां विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य परीक्षण किया। इसके बाद सुबह हेलीकॉप्टरों के जरिए उन्हें कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया। सुरक्षित लैंडिंग के लिए पार्क में 5 हेलीपैड तैयार किए गए थे। सुबह करीब 9:30 बजे तक सभी चीतों को क्वारंटाइन बाड़ों में छोड़ दिया गया।
एक महीने क्वारंटाइन, फिर खुले जंगल में दौड़
बोत्सवाना से आए सभी 9 चीतों को पहले एक महीने तक क्वारंटाइन में रखा जाएगा। इस दौरान उनकी स्वास्थ्य जांच, अनुकूलन प्रक्रिया और व्यवहार की निगरानी की जाएगी। इसके बाद उन्हें मुख्य बाड़े में छोड़ा जाएगा। कूनो की उपयुक्त पारिस्थितिकी, शिकार की उपलब्धता और सुरक्षित वातावरण ने चीतों के सफल प्रजनन को संभव बनाया है। यहां पहले से मौजूद कई मादाओं ने शावकों को जन्म दिया है, जिनमें गामिनी, ज्वाला और आशा प्रमुख हैं।
वैश्विक संरक्षण का मजबूत उदाहरण
यह ट्रांसलोकेशन अभियान वैश्विक वन्यजीव संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है। बोत्सवाना और भारत के बीच सहयोग ने इस परियोजना को नई दिशा दी है। अब तक 28 चीते भारत में ही जन्म ले चुके हैं, जो इस मिशन की सफलता का संकेत हैं। साथ ही, कूनो से 3 चीतों को गांधीसागर वन्य क्षेत्र में भी छोड़ा गया है, जिससे इनके विस्तार की योजना आगे बढ़ रही है।
चीतों की बढ़ती संख्या यह साबित करती है कि भारत में इस विलुप्त प्रजाति को फिर से स्थापित करने की दिशा में ठोस और वैज्ञानिक प्रयास किए जा रहे हैं।