मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क एक बार फिर वैश्विक स्तर पर सुर्खियों में है। प्रोजेक्ट चीता को आगे बढ़ाने के लिए अफ्रीकी देश बोत्सवाना से चीतों की तीसरी खेप लाने की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। नए साल में प्रस्तावित इस पहल से भारत में चीता पुनर्वास परियोजना को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
तीसरी खेप लाने की तैयारी तेज
कूनो नेशनल पार्क में प्रोजेक्ट चीता के तहत अफ्रीका से चीतों की तीसरी खेप लाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जानकारी के अनुसार, इस बार कुल आठ चीते भारत लाए जा सकते हैं। इन्हें जनवरी के अंतिम सप्ताह में कूनो नेशनल पार्क में शिफ्ट किए जाने की संभावना है। इससे पहले लाई गई खेपों के अनुभवों के आधार पर इस बार व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया गया है।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यवस्थाएं
चीतों के पुनर्वास के लिए कूनो में विशेष बोमा यानी बड़े सुरक्षित बाड़े तैयार किए गए हैं। इन बाड़ों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि चीते प्राकृतिक वातावरण में खुद को सहज महसूस कर सकें। भोजन व्यवस्था, पेयजल, स्वास्थ्य निगरानी और सुरक्षा इंतजामों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुदृढ़ किया गया है।
विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने किया निरीक्षण
तीसरी खेप से पहले कूनो की तैयारियों का आकलन करने के लिए बोत्सवाना से आए एक प्रतिनिधिमंडल ने पार्क का विस्तृत निरीक्षण किया। टीम ने जंगल क्षेत्र, बाड़ों की संरचना, स्वास्थ्य प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की बारीकी से समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान प्रोजेक्ट चीता की अब तक की प्रगति पर संतोष जताया गया और व्यवस्थाओं को उपयुक्त बताया गया।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मजबूत होता प्रोजेक्ट
भारत और बोत्सवाना के बीच हुए समझौते के तहत आठ चीतों को भारत भेजने पर सहमति बनी है। इस सहयोग से न केवल कूनो नेशनल पार्क को मजबूती मिलेगी, बल्कि भारत में विलुप्त हो चुके चीतों के पुनर्वास की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है। भविष्य में अन्य उपयुक्त स्थलों पर भी इस परियोजना का विस्तार किया जा सकता है।
कूनो नेशनल पार्क की प्राकृतिक खासियत
करीब 1235 वर्ग किलोमीटर में फैला कूनो नेशनल पार्क अपने खुले घास के मैदानों और कर्दई, खैर व सालई के जंगलों के लिए जाना जाता है। यहां का विस्तृत घास क्षेत्र और अनुकूल जलवायु चीतों के लिए आदर्श मानी जाती है। मानसून से पहले ही हरे हो जाने वाले कर्दई के पेड़ इस क्षेत्र की जैव विविधता और जीवटता को दर्शाते हैं।