मध्यप्रदेश का कूनो नेशनल पार्क एक बार फिर देशभर में चर्चा का केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार सुबह दो नई मादा चीताओं को खुले जंगल में छोड़कर ‘प्रोजेक्ट चीता’ को नई रफ्तार दी। बोत्सवाना से लाई गई इन चीताओं के जंगल में पहुंचते ही कूनो में चीतों की संख्या बढ़कर 57 हो गई है। पिछले तीन वर्षों में यहां 49 शावकों का जन्म होना इस बात का बड़ा संकेत है कि कूनो की आबोहवा अब चीतों के लिए पूरी तरह अनुकूल साबित हो रही है।
कूनो के जंगलों में बढ़ी चीतों की हलचल
सोमवार सुबह कूनो नेशनल पार्क में खास हलचल देखने को मिली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों मादा चीताओं को बाड़े से मुक्त कर प्राकृतिक आवास में छोड़ा। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच यह पूरा अभियान चलाया गया। जैसे ही दोनों चीते खुले जंगल में पहुंचे, वन अधिकारियों और वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह का माहौल बन गया।
बोत्सवाना से आईं नई मेहमान चीते
इन दोनों मादा चीताओं को फरवरी 2026 में बोत्सवाना से भारत लाया गया था। तय प्रक्रिया के तहत उन्हें पहले क्वारंटीन और फिर अनुकूलन केंद्र में रखा गया। विशेषज्ञों की निगरानी में उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई। सफल अनुकूलन के बाद अब उन्हें कूनो नदी के पास खुले वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया है।
कूनो की आबोहवा चीतों के लिए बन रही मुफीद
कूनो में लगातार बढ़ रही चीतों की संख्या वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बड़ी सफलता मानी जा रही है। पिछले तीन साल में यहां 49 शावकों का जन्म हो चुका है। हाल ही में मादा चीता गामिनी ने खुले जंगल में चार शावकों को जन्म दिया था। खास बात यह रही कि भारत में जन्मी किसी मादा चीता का प्राकृतिक वातावरण में यह पहला सफल प्रजनन माना गया।
प्रोजेक्ट चीता को मिली नई ताकत
सरकार अब कूनो को केवल एक नेशनल पार्क नहीं, बल्कि ग्लोबल चीता ब्रीडिंग सेंटर के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से आए चीते मिलकर भारत में एक मजबूत और टिकाऊ चीता आबादी तैयार करेंगे। इससे देश में विलुप्त हो चुके चीतों की वापसी का सपना और मजबूत होगा।
‘टाइगर स्टेट’ से ‘वाइल्डलाइफ लीडर’ बनने की ओर MP
मध्यप्रदेश पहले ही देश में ‘टाइगर स्टेट’ के रूप में पहचान बना चुका है। अब ‘प्रोजेक्ट चीता’ की सफलता के बाद राज्य वन्यजीव संरक्षण के नए मॉडल के रूप में उभर रहा है। सरकार इसे केवल जानवरों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कूनो में बढ़ती चीता आबादी इसी बदलती तस्वीर का बड़ा उदाहरण बनती जा रही है।