लद्दाख की सर्द हवाओं में राजनीति की गर्मी बढ़ गई है। हाल ही में हुए हिंसक घटनाक्रम ने पूरे देश को चौंका दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला है और लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग दोहराई है। 24 सितंबर को हुई हिंसा और सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद हालात और भी रहस्यमय होते जा रहे हैं।
24 सितंबर की घटना ने बदली तस्वीर
लद्दाख में 10 सितंबर से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक के नेतृत्व में अचानक हालात बिगड़ गए। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस दौरान भीड़ ने स्थानीय भाजपा कार्यालय और कुछ सरकारी वाहनों में आगजनी कर दी। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई और करीब 80 लोग घायल हुए। पुलिस ने वांगचुक पर भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाते हुए उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया।
पाकिस्तानी कनेक्शन का दावा
लद्दाख के डीजीपी ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि पुलिस ने एक पाकिस्तानी पीआईओ को पकड़ा है, जो कथित तौर पर सोनम वांगचुक के संपर्क में था। वहीं, गृह मंत्रालय ने आरोप लगाया कि वांगचुक ने अपने भाषण में अरब स्प्रिंग और नेपाल की जेन-जेड क्रांति का उल्लेख कर भीड़ को उकसाया। इस दावे ने पूरे मामले को और भी रहस्यमय बना दिया है।
राहुल गांधी का पलटवार
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स (Twitter) पर लिखा कि लद्दाख की संस्कृति और परंपराएं बीजेपी और आरएसएस के निशाने पर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार लद्दाख के लोगों को डरा रही है और सोनम वांगचुक को जेल में डालकर आंदोलन की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। राहुल ने हिंसा बंद करने और लद्दाख को छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांग दोहराई।
वांगचुक की अपील और सरकार की कार्रवाई
हिंसा के बाद वांगचुक ने 15 दिवसीय अनशन समाप्त कर समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की। उधर, सरकार ने उनके संस्थान SECMOL का विदेशी अंशदान (FCRA) लाइसेंस रद्द कर दिया और कहा कि क्षेत्रीय समूहों से बातचीत के लिए समानांतर चैनल खुले हैं।