मध्य प्रदेश की सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘लाड़ली बहना योजना’ पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने गंभीर सवाल उठाए हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव द्वारा 1.26 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में हर माह 1250 रुपए ट्रांसफर किए जाने के बाद, दिग्विजय सिंह ने सवाल किया कि क्या इतनी मामूली राशि में महंगे प्राइवेट स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई, अच्छा स्वास्थ्य सेवा और पौष्टिक आहार मुहैया कराया जा सकता है। इस योजना की प्रभावशीलता पर उठ रहे हैं बड़े सवाल।
लाड़ली बहना योजना: क्या है इसका उद्देश्य?
लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की एक प्रमुख सामाजिक योजना है, जिसका उद्देश्य महिलाओं की सामाजिक स्थिति को सशक्त बनाना और उन्हें आर्थिक मदद प्रदान करना है। इस योजना के तहत राज्य सरकार ने हर माह 1250 रुपए की राशि उन महिलाओं के बैंक खाते में ट्रांसफर करने का निर्णय लिया है, जो परिवार की बहन हैं। सरकार का दावा है कि इससे लड़कियों की पढ़ाई-लिखाई और सामाजिक स्थिति में सुधार आएगा।
दिग्विजय सिंह के सवाल: यथार्थ बनाम योजना
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और पोषण के बढ़ते खर्चों को ध्यान में रखते हुए 1250 रुपए महीना बेहद कम राशि है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या लाड़ली बहनें सरकारी अंग्रेजी स्कूलों के अभाव में महंगे प्राइवेट स्कूलों में तीन संतान को पढ़ाकर इंजीनियर या डॉक्टर बना सकती हैं। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि बीमार पड़ने पर क्या ये पैसे प्राइवेट अस्पताल में इलाज के लिए पर्याप्त होंगे।
क्या ये पैसा इनके मामा के घर से आता है?” – दिग्विजय सिंह
यह सवाल योजना की वास्तविक प्रभावशीलता और दीर्घकालिक लाभ पर बड़ा संदेह खड़ा कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि योजना के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता की राशि को यथार्थवादी बनाना आवश्यक है।
योजना की वर्तमान स्थिति और सरकार की प्रतिक्रिया
सीएम डॉ. मोहन यादव ने पेटलावद से 1.26 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में पैसे ट्रांसफर कर इस योजना को सशक्त बनाने का प्रयास किया है। सरकार का मानना है कि इससे लड़कियों की पढ़ाई, पोषण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में मदद मिलेगी। हालांकि, योजना के आलोचक इसे मात्र एक राजनीतिक प्रदर्शनी बता रहे हैं।
सरकार ने अभी तक पूर्व सीएम द्वारा उठाए गए सवालों पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन योजना के लाभार्थियों का कहना है कि यह राशि परिवार के छोटे खर्चों में मददगार साबित हो रही है।