उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में चल रही कांवड़ यात्रा के दौरान एक भावुक और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है. जिले में तैनात महिला सीओ ऋषिका सिंह खुद ड्यूटी के दौरान महिला कांवड़ियों के पैर दबाती हुई नजर आईं. यह तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है और लोग उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं.
ड्यूटी के साथ सेवा
ऋषिका सिंह ने कहा, "ये हमारी ड्यूटी ही नहीं, बल्कि फर्ज है. जो लोग गंगाजल लेकर इतनी लंबी यात्रा कर रहे हैं, उनकी सेवा करना हमारी जिम्मेदारी है." उन्होंने बताया कि उनके वरिष्ठ अधिकारी भी यही कहते हैं कि ड्यूटी के साथ-साथ भक्तों की मदद और सेवा में भी पीछे न रहें.
कहां की हैं रहने वाली ?
ऋषिका सिंह लखनऊ की रहने वाली हैं और 2022 बैच की पीपीएस अधिकारी हैं. यूपी पीसीएस परीक्षा में उन्हें 80वीं रैंक मिली थी. इससे पहले वो तीन बार यूपीएससी की परीक्षा भी दे चुकी हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार पीसीएस में सफलता पाकर डिप्टी एसपी बन गईं.
दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई
ऋषिका ने लखनऊ से कॉमर्स में 12वीं और फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी के दौलतराम कॉलेज से बीकॉम ऑनर्स किया. पहले उनका मन MBA करने का था और CAT की तैयारी भी शुरू की, लेकिन बीच में छोड़ दिया. फिर सोचा कि टीचर बनें, लेकिन आखिरकार फैसला लिया कि सिविल सेवा की तैयारी करेंगी.
असफलताओं के बाद भी नहीं मानी हार
उन्होंने 2019 में पहली बार UPSC दी, लेकिन प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं कर पाईं. 2020 और 2021 में इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन फाइनल सिलेक्शन नहीं हुआ. इस दौरान वह डिप्रेशन जैसी स्थिति में भी पहुंच गईं और दिल्ली छोड़कर लखनऊ लौट आईं. लेकिन हिम्मत नहीं हारी और 2022 में PCS पास कर डिप्टी एसपी बन गईं.
फिलहाल ऋषिका सिंह की पहली पोस्टिंग मुजफ्फरनगर में है. कांवड़ यात्रा के दौरान वो शामली-मुजफ्फरनगर बॉर्डर पर लालू खेड़ी चौकी के पास ड्यूटी कर रही थीं. रात के समय उन्होंने कुछ महिला कांवड़ियों को थकान से जूझते देखा तो उन्हें बैठाकर पैर दबाए और आराम कराया. उनका यह कार्य न केवल सराहनीय है बल्कि यह दिखाता है कि वर्दी में भी संवेदनशीलता और सेवा भाव जिंदा है.
पुलिस की सतर्कता भी नजर आ रही
ऋषिका ने बताया कि कांवड़ यात्रा को लेकर पुलिस पूरी तरह अलर्ट है. अब तक कोई छेड़छाड़ या असामाजिक गतिविधि सामने नहीं आई हैं. सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है ताकि अफवाह या कोई गड़बड़ी न फैले.