जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित अधारताल क्षेत्र में स्थित लक्ष्मी नारायण पचमठा मंदिर श्रद्धा और रहस्य का अनोखा संगम है। कहा जाता है कि इस प्राचीन मंदिर में स्थापित मां लक्ष्मी की प्रतिमा पर सूर्य की पहली किरण सीधे उनके चरणों पर पड़ती है, जो इस मंदिर की सबसे विशेष बातों में से एक है। यहां मां लक्ष्मी दिन में तीन बार अपना रंग बदलती हैं—सुबह सफेद, दोपहर में पीली और शाम को नीली। यही कारण है कि दीपावली के समय यह मंदिर श्रद्धालुओं से भरा रहता है।
तीन रंगों में झलकती हैं मां लक्ष्मी
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि हर दिन भक्त मां के तीन रूपों के दर्शन करते हैं। प्रातः काल में मां का चेहरा श्वेत आभा लिए रहता है, दोपहर के समय सुनहरा और शाम को नीला। यह अद्भुत परिवर्तन मानवीय दृष्टि से अकल्पनीय माना जाता है। कई श्रद्धालु केवल इस अद्भुत दृश्य के लिए दूर-दूर से यहां आते हैं।
गोंडवाना काल से जुड़ा इतिहास
लक्ष्मी नारायण पचमठा मंदिर का निर्माण गोंडवाना शासनकाल में रानी दुर्गावती के सेनापति दीवान अधार सिंह ने करवाया था। माना जाता है कि इसी अधार सिंह के नाम पर अधारताल का नाम पड़ा। यह मंदिर कभी तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र भी रहा है, जहां साधक धन-समृद्धि की प्राप्ति के लिए मां लक्ष्मी की आराधना किया करते थे।
श्रीयंत्र की अनूठी संरचना
मंदिर के चारों ओर लगभग 1100 वर्ष पुराना श्रीयंत्र बना हुआ है, जो मंदिर की ऊर्जा और वास्तुशक्ति को विशेष बनाता है। कहा जाता है कि यह श्रीयंत्र मंदिर की शक्ति को स्थिर रखता है और भक्तों की साधना को पूर्णता प्रदान करता है।
मनोकामना पूर्ति का आस्था स्थल
मान्यता है कि जो व्यक्ति सात शुक्रवार तक लगातार यहां दर्शन करता है, उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। दिवाली की रात मंदिर के पट बंद नहीं होते, बल्कि पूरी रात दीपों की रोशनी और मां लक्ष्मी के पंचगव्य महाभिषेक से परिसर गूंजता रहता है। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से मां के दरबार में आने वाला कभी खाली हाथ नहीं लौटता।