भारतीय बैडमिंटन के उभरते सितारे लक्ष्य सेन ने जब शुरुआत की थी, तब उन्हें अगले बड़े सुपरस्टार के रूप में देखा गया था। लेकिन BWF सर्किट पर पाँच साल गुज़ारने के बाद भी उनकी टॉप तक की यात्रा पूरी तरह से स्थिर नहीं हो पाई है। पिछले सीजन उनके करियर का सबसे निराशाजनक दौर रहा। पेरिस ओलिंपिक के बाद लक्ष्य मानसिक रूप से दबाव महसूस कर रहे थे और शुरुआत में शारीरिक समस्याएँ भी सामने आईं। उन्होंने बताया कि छोटे-छोटे बैक स्पैज़्म और मैच इंटेनसिटी के कारण उन्हें लगातार दिक्कत हो रही थी। इसी वजह से उन्हें ट्रेनिंग और रिकवरी दोनों में बदलाव की ज़रूरत पड़ी।
नई सोच और मेंटल कोच का बड़ा असर
पेरिस ओलिंपिक में कांस्य पदक से चूकने के बाद लक्ष्य अपनी असफलताओं का बोझ महसूस कर रहे थे। पिछले प्रदर्शन दिमाग में बार-बार लौटता था और यह उनके खेल पर असर डाल रहा था। इस बीच इजरायली मेंटल-परफॉर्मेंस कोच निमरोड मॉन ब्रॉकमैन जुड़ने के बाद उनकी सोच में महत्वपूर्ण बदलाव आया। वही कोच पहले एचएस प्रणय, जोस बटलर और राजस्थान रॉयल्स के साथ भी काम कर चुके हैं। लक्ष्य ने बताया कि अब वह न तो जल्दी जीतने की सोचते हैं और न ही भविष्य के दबाव में रहते हैं। उनकी प्राथमिकता सिर्फ खेल का आनंद लेना, सही प्रोसेस पर ध्यान देना और मानसिक रूप से मुक्त रहना है।
खेल में तकनीकी बदलाव, नए कोच का योगदान
2022 कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट लक्ष्य सेन ने बताया कि दक्षिण कोरियाई कोच यू योंग-संग के साथ काम करने के बाद उन्होंने अपने खेल में कई अहम तकनीकी परिवर्तन किए। कोच ने उन्हें समझाया कि 3–4 साल बाद विरोधी खिलाड़ी आपके खेल को पढ़ने लगते हैं, इसलिए वेरिएशन जरूरी होता है। लक्ष्य ने नेट पर होल्ड, बैक-कोर्ट से नए एंगल और शॉट्स में धोखा देने की कला पर खास काम किया है। ये बदलाव उनके हालिया खेल में साफ नजर भी आए, खासकर ऑस्ट्रेलियन ओपन जीत में।
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डाइविंग शॉट्स, फिटनेस और भविष्य की तैयारी
मैचों में लक्ष्य की डाइविंग रिट्रीव्स देखने लायक होती हैं, लेकिन उन्होंने बताया कि वह ट्रेनिंग में ऐसा कभी अभ्यास नहीं करते। अभ्यास में वह खुद को चोट से दूर रखने के लिए ऐसे जोखिम से बचते हैं। ऑस्ट्रिया के सल्जबर्ग स्थित एथलीट परफॉर्मेंस सेंटर में की गई फिटनेस ट्रेनिंग ने भी उनकी रिकवरी और स्ट्रेंथ बढ़ाने में मदद की है। लक्ष्य का कहना है कि अब वह जल्दबाज़ी में नहीं हैं, बल्कि हर टूर्नामेंट को एक सीख की तरह ले रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि वे मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से मजबूत होकर लगातार बेहतर प्रदर्शन करें।