Lal Bahadur Shastri Jayanti: देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी दिल्ली स्थित विजय घाट पहुंचे, जहां उन्होंने शास्त्री जी की समाधि पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर देश एक बार फिर उस महान व्यक्तित्व को याद कर रहा है, जिसने सादगी, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया। लाल बहादुर शास्त्री का जीवन भारतीय राजनीति में सादगी और दृढ़ संकल्प की एक ऐसी मिसाल है, जो आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित करती है। उनका व्यक्तित्व बताता है कि किसी इंसान की महानता उसके पद या संपत्ति से नहीं, बल्कि उसके विचारों और कर्मों से तय होती है।
'जय जवान, जय किसान' का दिया था नारा
लाल बहादुर शास्त्री ने देश को 'जय जवान, जय किसान' का ऐतिहासिक नारा दिया था। यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि भारत की ताकत और आत्मनिर्भरता का संदेश था। वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने देश का नेतृत्व किया और कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्र का मनोबल बनाए रखा। उनके नेतृत्व में देश ने एकजुटता और आत्मविश्वास के साथ चुनौतियों का सामना किया। किसानों और जवानों के योगदान को समान महत्व देने वाला उनका संदेश आज भी प्रासंगिक है।
सादगी की मिसाल थे शास्त्री जी
2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में जन्मे शास्त्री जी ने अपने सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और नैतिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उनका जीवन बेहद सादा रहा। यही वजह है कि उन्हें आज भी एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाता है, जिनके लिए देशहित हमेशा व्यक्तिगत हित से ऊपर था। विजय घाट पर प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धांजलि के साथ ही देश ने उस महान नेता को याद किया, जिनकी विरासत आज भी नई पीढ़ी को ईमानदारी, कर्तव्य और देशप्रेम का रास्ता दिखाती है। शास्त्री जी का जीवन संदेश देता है कि सच्ची देशभक्ति बड़े-बड़े शब्दों में नहीं, बल्कि छोटे-छोटे कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाने में है।