राजनीति समय का खेल है और समय कभी किसी को बख्शता नहीं इसका सबसे बड़ा उदाहरण आज लालू यादव खुद बन गए हैं. कभी संसद में लालू ने युवा भगवाधारी योगी आदित्यनाथ का मजाक उड़ाते हुए कहा था बाबा का काम है घंटी बजाना। तब योगी शांत रहे, कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन राजनीति में धैर्य सबसे बड़ा हथियार होता है, और वही धैर्य वर्षों बाद योगी ने बिहार की राजनीति में दिखाया। इस बार शब्दों में नहीं, काम में जवाब मिला। योगी ने ऐसा राजनीतिक डंका बजाया कि लालू और तेजस्वी की पूरी सियासी लय बिगड़ गई। बिहार चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया कि साधु शांत जरूर होते हैं, लेकिन समय आने पर जवाब ऐसा देते हैं जिसे पूरा देश देखता है।
योगी का चुनावी तूफान
बिहार चुनाव में योगी आदित्यनाथ की एंट्री लालू–तेजस्वी के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुई। योगी ने बिहार में 31 रैलियां कीं और उनमें से 28 सीटें NDA की झोली में गईं। यानी लगभग 90% स्ट्राइक रेट एक ऐसा आंकड़ा जो सीधे-सीधे बताता है कि जनता योगी की बात क्यों सुन रही थी। अपराध, जंगलराज और लालू–राबड़ी शासन की पुरानी यादों को योगी ने हर भाषण में जोड़कर पेश किया। लोकतंत्र और कानून व्यवस्था पर योगी के संदेश ने मतदाताओं के मन में गहरा असर छोड़ा। दूसरी तरफ तेजस्वी ने यूपी से अखिलेश यादव को बुलाया, जिन्होंने 22 सीटों पर प्रचार किया लेकिन जीत सिर्फ 2 पर मिली। ये तुलना ही बताती है कि बिहार की जनता किस नेतृत्व को तरजीह दे रही थी।
भीड़ ने दिया जोरदार समर्थन
प्रधानमंत्री मोदी के बाद सबसे भीड़भरी रैलियां योगी की रहीं। लोग छतों से लेकर पेड़ों तक पर चढ़कर उन्हें सुनते थे। बिहार में योगी केवल मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि ‘माफिया खत्म करने वाले संन्यासी’ की छवि के साथ उतरे थे। अपराध और भ्रष्टाचार पर योगी के तीखे हमले और लालू–राबड़ी राज की याद दिलाते बयानों ने जनता की नब्ज पकड़ ली। जब योगी कहते बिहार को विकसित होना है, तो अपराधमुक्त होना जरूरी है भीड़ तालियों से फट पड़ती थी। यह प्रभाव दिखाता है कि बिहार में योगी की लोकप्रियता सिर्फ चुनावी भाषण की वजह से नहीं, बल्कि उनके कार्यकाल की छवि की वजह से थी।
लालू के ताने का मिला जवाब
लालू यादव ने जिस दिन संसद में कहा था बाबा घंटी बजाओ उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यही तंज एक दिन उनके खिलाफ हथियार बन जाएगा। योगी ने न बोलकर, सीधे चुनावी मैदान में जवाब दिया। उन्होंने तेजस्वी को सत्ता से दूर रखा, महागठबंधन की उम्मीदें खत्म कर दीं और लालू की सियासी पकड़ को हिला दिया। राजनीतिक जानकार कह रहे हैं कि यह सिर्फ चुनाव नहीं था, यह योगी का अपने पुराने अपमान का शांत लेकिन सबसे तीखा जवाब था। आज इंटरनेट पर लालू का वही पुराना वीडियो घूम रहा है और लोग कह रहे हैं जिस बाबा को हल्का समझा, वही बाबा अब राष्ट्रीय राजनीति में सबसे बड़ा चेहरा बनकर खड़ा है