दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बहुचर्चित लैंड फॉर जॉब मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना है कि रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले जमीन लेने की एक संगठित साजिश रची गई थी। इस मामले में तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव भी आरोपों के दायरे में आए हैं।
कोर्ट के आदेश से बढ़ी लालू परिवार की मुश्किलें
दिल्ली की विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि चार्जशीट में ऐसे ठोस संकेत मौजूद हैं, जिनसे यह प्रतीत होता है कि रेलवे में नियुक्तियों के बदले जमीन हासिल करने की योजना बनाई गई थी। अदालत ने माना कि इस पूरे प्रकरण में लालू यादव ने रेल मंत्री रहते हुए अपने पद का कथित तौर पर दुरुपयोग किया।
तेजस्वी और तेज प्रताप पर भी तय होंगे आरोप
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में लालू यादव के साथ-साथ उनके बेटों तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव के खिलाफ भी आरोप तय किए जाएंगे। अदालत के अनुसार, परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका भी जांच के दायरे में आती है, जिससे यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामूहिक साजिश की ओर इशारा करता है।
‘आपराधिक गिरोह की तरह काम’— कोर्ट की सख्त टिप्पणी
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि चार्जशीट से यह संकेत मिलता है कि पूरा परिवार एक आपराधिक गिरोह की तरह कार्य कर रहा था। कोर्ट ने माना कि जमीनों का हस्तांतरण बेहद कम कीमत पर किया गया और बदले में सरकारी नौकरियां दी गईं, जो गंभीर आपराधिक संदेह को जन्म देता है।
52 लोगों को मिली राहत, कई अब भी आरोपी
इस केस में अदालत ने जहां 52 लोगों को आरोपों से बरी कर दिया, वहीं लालू यादव परिवार सहित 40 से अधिक लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि जिनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले, उन्हें इस स्तर पर राहत दी गई है।
क्या है ‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाला?
यह मामला वर्ष 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी समेत अन्य पदों पर नियुक्ति के बदले उम्मीदवारों या उनके परिवारों से जमीन ली गई और वह जमीन लालू परिवार या उनसे जुड़े लोगों के नाम कराई गई।
CBI और ED की जांच में क्या सामने आया?
जांच एजेंसियों के अनुसार, कई भर्तियों में न तो कोई सार्वजनिक विज्ञापन निकाला गया और न ही निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया। कुछ आवेदनों को मात्र तीन दिनों में मंजूरी दी गई। उम्मीदवारों को मुंबई, कोलकाता, जबलपुर, जयपुर और हाजीपुर जैसे रेलवे जोनों में नियुक्त किया गया, जबकि जमीनें बेहद कम कीमत पर ट्रांसफर कराई गईं।
अब आगे क्या?
आरोप तय होने के बाद अब इस मामले में नियमित ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी। आने वाले समय में गवाहों की पेशी और सबूतों की जांच से यह तय होगा कि आरोप न्यायिक कसौटी पर कितने टिकते हैं।