महाराष्ट्र के शहरी निकाय चुनाव ने सत्ता साझेदारों—मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और सीएम एकनाथ शिंदे—को आमने-सामने ला खड़ा किया है। बीजेपी और शिवसेना कई नगर निगम व नगर पंचायतों में प्रत्यक्ष मुकाबले में हैं, जिस कारण दोनों नेताओं की बयानबाज़ी ‘लंका’, ‘रावण’ और ‘रामभक्त’ तक पहुंच गई है।
दोस्त अब बने सियासी प्रतिद्वंद्वी
2024 विधानसभा चुनाव में साथ चुनाव लड़ने वाले महायुति के तीनों दल—बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार)—स्थानीय निकाय चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं।
राज्य की 246 नगर पालिकाओं और 42 नगर पंचायतों के लिए 2 दिसंबर को मतदान होना है। 288 निकायों में 6,859 पार्षद चुनने हैं। कई सीटों पर सीधी टक्कर होकर गठबंधन के भीतर तनाव बढ़ गया है।
लंका-रावण’ बनाम ‘रामभक्त’ की जुबानी जंग
पालघर जिले के दहानू में शिवसेना प्रत्याशी के समर्थन में पहुंचे एकनाथ शिंदे ने बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “अहंकारी रावण की लंका जली थी, 2 दिसंबर को जनता भी वही करेगी।”
इस पर फडणवीस ने पलटवार करते हुए कहा, “हम लंका में रहते ही नहीं, हम राम के भक्त हैं… ऐसे बयानों को दिल पर न लें।”
फडणवीस ने आगे कहा कि उनका उम्मीदवार ‘भरत’ है, जो विकास विरोधी ताकतें सामने आने पर लंका जला देगा।
क्यों बढ़ी तकरार?
स्थानीय चुनावों में कोई भी दल अपनी राजनीतिक जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है। दोनों नेता अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए दूसरे के गढ़ में पैठ बना रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, फडणवीस–शिंदे के बीच की खटास नई नहीं है, लेकिन निकाय चुनाव ने इसे खुलकर मंच तक ला दिया है। कई जगह नेताओं को तोड़ने, टिकट बदलने और आरोप-प्रत्यारोप ने स्थिति और जटिल बना दी