SIR In UP: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटवाने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन दिए गए हैं। मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को शिकायतों की जांच करने और आवश्यक सुधार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश से जुड़ी जिन शिकायतों का अब तक समाधान नहीं हुआ है, उनकी पड़ताल कर आयोग जरूरी कार्रवाई करे और अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे।
पहले भी तीन राज्यों में फॉर्म-7 को लेकर उठे थे सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने बताया कि 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और केरल में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा होने से संबंधित शिकायतों पर जवाब मांगा था। वकील के मुताबिक, छत्तीसगढ़ और केरल में सामने आई शिकायतों का समाधान किया जा चुका है, लेकिन उत्तर प्रदेश में अभी भी समस्या बनी हुई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि फॉर्म-7 के जरिए मतदाता सूची से नाम हटवाने के लिए कथित तौर पर बड़े पैमाने पर आवेदन किए गए।
चुनाव आयोग ने कहा- शिकायत मिलने पर होगी जांच
चुनाव आयोग की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने अदालत को बताया कि केरल और छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए जाने की जानकारी मिली थी। आयोग के अधिकारियों ने इन आवेदनों की जांच की और उन्हें गलत पाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे आवेदनों के आधार पर किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया गया। उत्तर प्रदेश के मामले में उन्होंने कहा कि यदि कोई शिकायत है तो उसे औपचारिक रूप से आयोग के समक्ष दर्ज कराया जाए। शिकायत मिलने पर उसकी जांच की जाएगी।
एक विधानसभा क्षेत्र में 32 फॉर्म जमा होने का दावा
याचिकाकर्ता के वकील ने उत्तर प्रदेश के एक विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां एक विशेष समुदाय के लोगों को निशाना बनाकर 32 फॉर्म-7 जमा किए गए थे। इनमें से दो आवेदनों पर बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के हस्ताक्षर होने की बात भी कही गई। वकील ने यह भी दलील दी कि तेलंगाना और कर्नाटक में ऐसी शिकायतों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए, जबकि उत्तर प्रदेश में वैसी कार्रवाई नहीं हुई।
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सुप्रीम कोर्ट ने जांच कर रिपोर्ट देने को कहा
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने याचिकाकर्ता को उत्तर प्रदेश से जुड़ी कथित अनियमितताओं का पूरा विवरण चुनाव आयोग को देने को कहा। अदालत ने आयोग को निर्देश दिया कि शिकायतों की जांच की जाए, जिन मामलों में गड़बड़ी सामने आए उनमें जरूरी सुधार किए जाएं और इस संबंध में रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाए।
केरल में SIR की समय सीमा बढ़ाने से इनकार
सुनवाई के दौरान केरल में विशेष गहन पुनरीक्षण की समय सीमा बढ़ाने की मांग भी उठाई गई। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि कई लोगों को अभी मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और उसमें सुधार कराने की जरूरत है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे लोग अपने आवेदन चुनाव आयोग को दे सकते हैं और आयोग उनके मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेगा।