Large Student Demonstrations in France: फ्रांस में स्कूलों और यूनिवर्सिटी के छात्रों का आंदोलन लगातार बड़ा होता जा रहा है। शुरुआत स्कूलों में शिक्षकों, नर्सों और दूसरे जरूरी स्टाफ की कमी को लेकर हुई थी, लेकिन अब यह प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आंदोलन को प्रवासन और इस्लाम से जोड़ते हुए बड़ा दावा किया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि फ्रांस में वास्तव में आंदोलन की वजह क्या है और ट्रंप के दावे में कितनी सच्चाई है।
स्कूलों में स्टाफ की कमी से शुरू हुआ आंदोलन
मौजूदा आंदोलन की शुरुआत पेरिस के पास एक हाई स्कूल से बताई जा रही है। छात्रों का कहना है कि कई कक्षाओं में 32 से 35 तक विद्यार्थी हैं, लेकिन पर्याप्त शिक्षक और नर्स उपलब्ध नहीं हैं। दिव्यांग छात्रों की मदद करने वाले AESH स्टाफ की कमी की शिकायत भी सामने आई है। 21 सितंबर को छात्रों ने इसी समस्या को लेकर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद दूसरे स्कूलों के छात्र भी आंदोलन से जुड़ने लगे।
कई इलाकों में स्कूलों के बाहर प्रदर्शन और ब्लॉकेड
धीरे-धीरे आंदोलन फ्रांस के कई हिस्सों तक फैल गया। कई स्कूलों के बाहर छात्रों ने ब्लॉकेड लगाए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की। प्रदर्शन ऐसे समय में बढ़ा है, जब फ्रांस सरकार आर्थिक दबाव से जूझ रही है। प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू ने 2027 के बजट में करीब 54 अरब यूरो की बचत की योजना सामने रखी है। हालांकि, यह राशि पूरे सरकारी बजट से जुड़ी है और केवल शिक्षा क्षेत्र की कटौती नहीं है।
यह भी देखेंःधनराज नथवानी को टिकट देने पर राजभर का बड़ा दावा, बोले- BJP के कहने पर अखिलेश ने बनाया उम्मीदवार
ट्रंप ने आंदोलन को प्रवासन और इस्लाम से जोड़ा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि फ्रांस में हो रहे प्रदर्शन सिर्फ स्कूलों की समस्याओं तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने इसे बड़े पैमाने पर हो रहे प्रवासन और इस्लाम से जोड़ते हुए कहा कि इस्लाम फ्रांस पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, उपलब्ध घटनाक्रम में आंदोलन की शुरुआती वजह स्कूलों में शिक्षकों, नर्सों और सहायता स्टाफ की कमी बताई जा रही है। इसलिए ट्रंप के दावे को आंदोलन की मूल वजह के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा।
प्रदर्शन में हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं
6 अक्टूबर को आंदोलन के तीसरे राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन में छात्र संगठनों के साथ कई ट्रेड यूनियन भी शामिल हुईं। फ्रांस के गृह मंत्रालय ने करीब 2.66 लाख लोगों के प्रदर्शन में शामिल होने की बात कही, जबकि छात्र संगठन USL ने यह संख्या करीब 4.50 लाख बताई। सरकार के मुताबिक हिंसा की घटनाओं में 215 छात्र और 85 स्कूल कर्मचारी घायल हुए हैं। न्याय मंत्रालय ने 6 हजार से ज्यादा गिरफ्तारियों की जानकारी दी है और 100 से अधिक स्कूलों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। मार्सेई में आग बुझाने पहुंचे दमकल वाहन को भी आग के हवाले किए जाने की घटना सामने आई। यानी आंदोलन की शुरुआत शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं से हुई, लेकिन बाद में कुछ जगहों पर यह व्यापक राजनीतिक और सामाजिक तनाव का रूप भी लेता दिखाई दिया।