
साल 2025 का अंतिम चंद्र ग्रहण एक विशेष खगोलीय घटना के रूप में देखा जाएगा, जो 7 सितंबर की मध्य रात्रि को घटित होगा। यह चंद्र ग्रहण धार्मिक और खगोलीय दोनों ही दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर क्योंकि यह पितृ पक्ष के दौरान पड़ रहा है। भारत सहित विश्व के कई हिस्सों में यह आंशिक चंद्र ग्रहण दिखाई देगा, जिससे सूतक काल और धार्मिक गतिविधियों पर भी प्रभाव पड़ेगा।
चंद्र ग्रहण की तिथि और समय
यह चंद्र ग्रहण 7 सितंबर 2025 को रात के समय शुरू होगा और 8 सितंबर की तड़के तक चलेगा। ग्रहण की अवधि लगभग 3 घंटे तक रहेगी। ग्रहण की आंशिकता का आरंभ रात्रि लगभग 10:27 बजे से होगा और इसका मध्यकाल 11:52 बजे के आसपास माना जा रहा है। पूर्ण ग्रहण की समाप्ति तड़के 1:18 बजे होगी।
कहां-कहां दिखाई देगा यह ग्रहण?
यह आंशिक चंद्र ग्रहण भारत के अधिकांश हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। इसके अलावा एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, यूरोप और अटलांटिक महासागर के कुछ क्षेत्रों में भी इसे देखा जा सकेगा। चंद्रमा का आंशिक रूप से ढंक जाना लोगों को नंगी आंखों से भी नजर आएगा, जिससे यह खगोलीय घटना विशेष रूप से आकर्षक मानी जा रही है।
सूतक काल का प्रभाव
हिंदू धर्म में ग्रहण के समय को अत्यंत संवेदनशील और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। चूंकि यह ग्रहण रात्रि में हो रहा है, इसका सूतक काल 7 सितंबर को दोपहर से ही आरंभ हो जाएगा। सामान्यतः चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण लगने से 9 घंटे पूर्व प्रारंभ होता है। इसलिए इस दिन दोपहर लगभग 1:27 बजे से सूतक लगेगा और ग्रहण समाप्ति तक प्रभाव में रहेगा। सूतक काल में मंदिरों के द्वार बंद रहते हैं, पूजा-पाठ वर्जित होता है और खाने-पीने की वस्तुओं को तुलसी पत्तों से सुरक्षित किया जाता है। चूंकि यह पितृ पक्ष में आ रहा है, इसलिए पितरों के तर्पण और श्राद्ध से जुड़े कार्यों को ग्रहण काल से पहले ही संपन्न करने की सलाह दी जाती है।