
सावन का महीना जहां शिव भक्ति के लिए प्रसिद्ध है, वहीं इस पावन माह का हर दिन किसी न किसी देवता की विशेष आराधना के लिए भी शुभ माना जाता है। सावन का अंतिम रविवार सूर्य देव की उपासना के लिए विशेष रूप से फलदायी होता है। इस दिन यदि विधिपूर्वक सूर्य मंत्रों का जाप किया जाए, तो न केवल मानसिक और शारीरिक बल की प्राप्ति होती है, बल्कि जीवन की अनेक समस्याएं भी दूर होती हैं।हिंदू धर्म में सूर्य देव को साक्षात प्रत्यक्ष देवता माना गया है – अर्थात् जिन्हें आंखों से देखा जा सकता है। वे ऊर्जा, सेहत, आत्मबल और तेज के प्रतीक हैं। कहा जाता है कि सूर्य देव की कृपा से व्यक्ति को दीर्घायु, सफलता और सम्मान प्राप्त होता है। इसलिए, सावन के अंतिम रविवार को यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक सूर्य देव के मंत्रों का जाप किया जाए, तो शुभ फल अवश्य मिलते हैं।
इन सूर्य मंत्रों का करें जाप
1. आदित्य हृदय स्तोत्र
यह स्तोत्र स्वयं श्रीराम को ऋषि अगस्त्य ने युद्ध के समय सुनाया था। इसका नियमित पाठ भय, शोक और मानसिक दुर्बलता को दूर करता है।
2. सूर्य गायत्री मंत्र
"ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्"
इस मंत्र के जाप से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और आत्मबल बढ़ता है।
3. बीज मंत्र
"ॐ घृणि सूर्याय नमः"
यह सूर्य का सबसे प्रभावशाली बीज मंत्र है, जिसे सूर्योदय के समय लाल आसन पर बैठकर 108 बार जपना चाहिए।
जप की विधि
रविवार के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य को अर्घ्य दें (जल में लाल फूल और अक्षत डालें)।
सूर्य मंत्रों का उच्चारण मनोयोग से करें।
जप के बाद सूर्य देव से मनोकामना पूर्ण करने की प्रार्थना करें।
लाभ
सावन के अंतिम रविवार को सूर्य देव का पूजन और मंत्र जाप करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर होती हैं, आत्मविश्वास बढ़ता है, नौकरी और व्यवसाय में सफलता मिलती है तथा पारिवारिक सुख-संपन्नता आती है।इसलिए, इस पावन अवसर पर सूर्य देव के मंत्रों का श्रद्धा से जाप अवश्य करें और अपने जीवन में नई ऊर्जा व सकारात्मकता का अनुभव करें।