वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में देर रात अचानक माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच कहासुनी ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। पत्थरबाजी की घटनाओं के बाद हालात बिगड़ते देख कई थानों की पुलिस फोर्स को मौके पर बुलाना पड़ा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन तनाव देर रात तक बना रहा। आइए जानते हैं यह विवाद कैसे शुरू हुआ और मौके पर कैसी स्थिति बनी।
कैसे भड़का विवाद?
घटना की शुरुआत कथित तौर पर हॉस्टल के पास एक छात्र और सुरक्षा कर्मियों के बीच हुई बहस से हुई। छात्र आरोप लगा रहे हैं कि सुरक्षा कर्मियों ने फ़िजूल रोक-टोक की, वहीं सुरक्षा कर्मी दावा कर रहे हैं कि छात्रों ने अनुशासनहीनता दिखाई। मामूली विवाद कुछ ही मिनटों में बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। आसपास के छात्र भी जुटने लगे, जिससे भीड़ बढ़ती गई और स्थिति और बिगड़ती चली गई।
पत्थरबाजी और अफरा-तफरी का माहौल
जैसे-जैसे भीड़ उग्र होती गई, कुछ छात्रों ने पत्थर फेंकने शुरू कर दिए, जिनका जवाब सुरक्षाकर्मियों ने भी कड़े रवैये के साथ दिया। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। कई छात्र इधर-उधर दौड़ते नजर आए, जबकि सुरक्षाकर्मी स्थिति को शांत करने की कोशिश करते रहे। हालांकि, पत्थरबाजी रुकने का नाम नहीं ले रही थी, जिससे विश्वविद्यालय के कई हिस्सों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना में कुछ लोगों के चोटिल होने की भी खबर सामने आई, हालांकि संख्या स्पष्ट नहीं है।
कई थानों की पुलिस बुलानी पड़ी
जब मामला काबू से बाहर जाने लगा, तो BHU प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में आसपास के कई थानों की फोर्स, PAC और विश्वविद्यालय सुरक्षा टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया और भीड़ को तितर-बितर करने में सफलता हासिल की। पुलिस अधिकारियों ने छात्रों को समझाते हुए किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने और परिसर में सामान्य स्थिति बनाए रखने की अपील की।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
BHU प्रशासन ने देर रात जारी बयान में बताया कि घटना की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालय ने सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करने के निर्देश दिए हैं। वहीं छात्र संगठनों ने सुरक्षाकर्मियों के व्यवहार पर सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रशासन ने कहा है कि छात्रों की सुरक्षा प्रथम प्राथमिकता है और किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।