निवेश के नाम पर 3200 करोड़ रुपये की कथित ठगी करने वाले मास्टरमाइंड लविश चौधरी को भारत लाने की कवायद तेज हो गई है। जांच एजेंसियों को उसके संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में होने की पुष्टि मिली है, जिसके बाद विशेष कार्यबल (STF) ने प्रत्यर्पण प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। कोर्ट वेरिफिकेशन के बाद दस्तावेज अंग्रेजी और अरबी में तैयार कराए गए हैं, ताकि यूएई प्रशासन से औपचारिक संवाद स्थापित किया जा सके।
12 से ज्यादा राज्यों में फैला था नेटवर्क
जांच के मुताबिक लविश चौधरी ने संगठित गिरोह के जरिए देशभर के 12 से अधिक राज्यों में निवेश योजनाओं के नाम पर हजारों लोगों को झांसा दिया। शुरुआती दौर में ऊंचे रिटर्न का लालच देकर निवेश कराया गया, लेकिन बाद में बड़ी रकम लेकर नेटवर्क गायब हो गया। अनुमान है कि इस पूरे घोटाले में करीब 3200 करोड़ रुपये की ठगी की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्तर पर विशेष जांच तेज की गई।
कोर्ट से वेरिफिकेशन के बाद अरबी-अंग्रेजी में दस्तावेज
सूत्रों के अनुसार, अब तक की कार्रवाई और आरोपी पर लगे आरोपों का इंदौर की अदालत से विधिवत सत्यापन कराया गया है। इसके बाद सभी जरूरी दस्तावेज अंग्रेजी और अरबी भाषा में अनुवादित कराए गए। चूंकि आरोपी के United Arab Emirates में शरण लेने की जानकारी सामने आई है, इसलिए वहां की आधिकारिक भाषा और प्रशासनिक प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। इससे प्रत्यर्पण अनुरोध को औपचारिक रूप देने में आसानी होगी।
CID और गृह मंत्रालय तक पहुंचेगी फाइल
एसटीएफ द्वारा तैयार किया गया आरोपों का विस्तृत ब्योरा इसी सप्ताह पुलिस मुख्यालय की सीआईडी शाखा को भेजा जाएगा। वहां परीक्षण के बाद फाइल राज्य गृह विभाग के जरिए केंद्र सरकार को प्रेषित की जाएगी। इसके बाद मामला Ministry of Home Affairs तक पहुंचेगा, जहां से यूएई को औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा जा सकता है। कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित देश की अदालत में भी सुनवाई का अवसर दिया जाता है।
प्रत्यर्पण से पहले कानूनी जांच अहम
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी आरोपी को विदेश से वापस लाने के लिए दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि और कानूनी मानकों का पालन जरूरी होता है। यूएई में अदालत यह जांच करती है कि प्रस्तुत साक्ष्य पर्याप्त हैं या नहीं। यदि अनुरोध वैध पाया जाता है तो आरोपी को भारत लाने का रास्ता साफ हो सकता है। फिलहाल एजेंसियां दस्तावेजी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटी हैं, ताकि 3200 करोड़ के इस कथित घोटाले के मास्टरमाइंड को जल्द भारत लाया जा सके।