हाईकोर्ट की बेंच को लेकर 50 सालों से आंदोलन कर रहे अधिवक्ताओं ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जनरल हाउस में मुख्यमंत्री के बयान की निंदा करने के बाद अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि कचहरी में भाजपा सांसद, विधायक और मंत्रियों की एंट्री पर प्रवेश निषेध रहेगा। इसके लिए बैनर पोस्टर चस्पा किए जाएगा। साथ ही बार एसोसिएशन में भाजपा से जुड़े प्रतिनिधि सदस्य होने पर उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा और जवाब के आधार पर सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। आंदोलन को धार देने के लिए बुधवार को 22 जिलों के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे और आंदोलन को बड़े स्तर पर चलाने के लिए व्यापार संगठनों के साथ बुधवार को संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता होगी।
जनरल हाउस में मुख्यमंत्री के बयान की निंदा हुई
सोमवार को सुभारती यूनिवर्सिटी में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ प्रतिनिधिमंडल की वार्ता हुई थी। मंगलवार को कचहरी परिसर स्थित पंडित नानक चन्द सभागार में हाईकोर्ट बेंच स्थापना केन्द्रीय संघर्ष समिति चेयरमैन अनुज शर्मा और संयोजक परवेज आलम ने जनरल हाउस में मुख्यमंत्री से हुई वार्ता की जानकारी अधिवक्ताओं को दी। उन्होंने बताया, जिस वक्त हाईकोर्ट बेंच स्थापना की मांग को लेकर केन्द्रीय संघर्ष समिति का प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री से मिला तो उस वक्त भाजपा के सांसद, विधायक, मंत्री और मेयर वहां मौजूद थे। उन्होंने मुख्यमंत्री से वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच देने की लिया कहा तो मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा, किसी भी प्रदेश में हाईकोर्ट खंडपीठ की स्थापना माननीय उच्चतम न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आता है। इसमे प्रदेश सरकार का किसी प्रकार का योगदान नहीं होता तथा उनके द्वारा खंडपीठ देने से साफ इंकार कर दिया। खास बात यह है कि भाजपा के किसी भी जनप्रतिनिधि ने उनकी मांग का समर्थन नहीं किया और सभी चुप्पी साधे रहे। इसके बाद सभी अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री के बयान की निंदा की और बड़े स्तर पर आंदोलन करने का ऐलान किया।
भाजपा सांसद, विधायक और मंत्रियों की एंट्री बैन
चेयरमैन अनुज कुमार शर्मा ने बताया, जनरल हाउस में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि भाजपा के किसी भी प्रतिनिधि को कचहरी परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसमें सांसद, विधायक और मंत्री शामिल हैं। अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया, भाजपा से जुड़े अधिवक्ताओं पर भी कार्रवाई का फैसला लिया गया है, जिसके तहत मेरठ बार एसोसिएशन में भाजपा का कोई प्रतिनिधि सदस्य है तो उसे नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा और जवाब के आधार पर उसकी सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही एमपी-एमएलए कोर्ट में जनप्रतिनिधियों की ओर से अधिवक्ताओं द्वारा दाखिल वकालतनामे वापस लेने का निर्णय भी लिया गया।
बेंच नहीं तो वोट नहीं
जनरल हाउस में निर्णय लिया गया है कि बेंच नहीं तो वोट नहीं के स्लोगन, पोस्टर बैनर कचहरी परिसर के सभी गेटों पर चस्पा किए जाएंगे। साथ ही भाजपा सांसद, विधायक, मंत्री और पदाधिकारियों का कचहरी परिसर में प्रवेश निषेध के बैनर पोस्टर भी चस्पा किए जाएंगे। भाजपा जनप्रतिनिधियों का विरोध किया जाएगा।
डा.लक्ष्मीकांत को दिया वकालतनामा वापस लिया
चेयरमैन अनुज कुमार शर्मा ने बताया, अब भाजपा के किसी भी जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी से कोई सहयोग की अपेक्षा नहीं है। इसलिये पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आम जनता की उक्त न्यायोचित मांग के संबंध में भविष्य में किसी भी प्रकार की वकालत नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया, हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर सांसद डा. लक्ष्मीकान्त वाजपेयी को केन्द्रीय संघर्ष समिति ने पैरवी के लिए वकालतनामा दिया था, जिसे जनरल हाउस में सर्वसम्मति से वापस ले लिया गया। जनरल हाउस में मेरठ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष गण अजय त्यागी, अनिल कुमार बक्शी, गजेन्द्र सिंह थामा, सतीश चन्द गुप्ता, अशोक कुमार शर्मा, मांगेराम, उदयवीर सिंह राणा, कुंवर पाल शर्मा, संजय शर्मा और पूर्व महामंत्री गण प्रबोध कुमार शर्मा, देवकीनन्दन शर्मा, अमित कुमार दीक्षित आदि पदाधिकारी और काफी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।