अयोध्या राम मंदिर के दानपात्र से चोरी के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। राम जन्मभूमि मामले में हिंदू पक्ष के प्रमुख अधिवक्ताओं में शामिल रहे विष्णु शंकर जैन ने कहा- "कभी नहीं सोचा था कि राम के नाम पर दान में भी घोटाला होगा"। उन्होंने कहा कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी हो, उसे कानून के सामने जवाब देना होगा. उन्होंने कहा, "राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर अब तक जो घटनाक्रम सामने आए हैं, उससे हमें गहरा दुख और पीड़ा हुई है. जब हम पूरी कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे, तब हमारा मुख्य उद्देश्य ऐसा राम मंदिर बनाना था, जो पूरे देश के लिए एक आदर्श हो।
13 जून 2026 को सेवादार लवकुश तिवारी को पुलिस ने हिरासत में लिया। उसके घर से 10 लाख रुपये से ज्यादा नकदी बरामद हुई है। दानपात्रों की गिनती के दौरान करोड़ों की हेराफेरी का आरोप लगा। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सबसे पहले मुद्दा उठाया- "यह घोटाला नहीं डकैती है"। इस दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय बोले- "एक रुपया भी चोरी नहीं हो रहा"। मगर लवकुश के घर छापे के दौरान चंपत राय खुद सादे कपड़ों में मौजूद थे।
दान सिर्फ पैसा नहीं, श्रद्धालुओं का विश्वास
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े नेताओं में से एक स्वामी रामभद्राचार्य बोले,"वे सही नहीं कह रहे हैं। मैं केवल इतना ही कह सकता हूं कि एक रुपया भी चोरी नहीं हो रहा है"। पर साथ ही कहा - ट्रस्ट पर पूरा भरोसा है। वहीं अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, "यह घोटाला नहीं देश की सबसे बड़ी डकैती है। प्रभु श्री राम मंदिर में लोगों की आस्था और चढ़ावे की लूटपाट की गई है"। "ट्रस्ट को सस्पेंड कर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच हो"। सुप्रीम कोर्ट में CJI को चिट्ठी लिखी - "दान सिर्फ पैसा नहीं, श्रद्धालुओं का विश्वास है।
लवकुश की दादी का दर्द
हिरासत में लिए गए सेवादार की दादी गिरिजा देवी बोलीं, "सादे कपड़ों में आए लोगों ने घर की सारी नकदी ले ली। गांव वालों ने बताया चंपत राय भी साथ थे। जाते समय चंपत राय ने मुझे 200 रुपये दिए और कहा- माता जी, खा-पी लेना, आपकी तबीयत ठीक नहीं है"। परिवार का दावा-"जमीन परिवार के अन्य कमाने वाले सदस्यों के पैसों से खरीदी है"।
श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक
UP सरकार ने 3 सदस्यीय SIT बनाई। 4 दिन तक ट्रस्ट के 2 बड़े पदाधिकारियों से पूछताछ हुई, बयानों की वीडियोग्राफी भी हुई। जांच के बीच CM योगी 19 जून को अयोध्या पहुंचे। खबर है कि "विवादित पदाधिकारी CM से दूर रहेंगे"। राम मंदिर की लड़ाई लड़ने वाले" नेताओं का कहना है कि करोड़ों की आस्था "मंदिर में दिया गया दान केवल आर्थिक योगदान नहीं, श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है"। 500 साल पुराने मंदिर के लिए कोर्ट-जमीन पर लड़ाई लड़ी, आज उन्हीं के नाम पर चोरी हो रही है। ये दिन आएगा, कभी नहीं सोचा था" - आंदोलन से जुड़े एक संत का बयान।