इजरायल लेबनान में हिज्बुल्लाह को खत्म करने के लिए लगातार ऑपरेशन चलाता रहा है। ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही सीजफायर वार्ता में कई बार इस मुद्दे को उठाया है कहा कि दोनों देशों के बीच किसी भी समझौते में लेबनान में सीजफायर भी शामिल होगा, हालांकि इजरायल इससे सहमत नहीं है। इस बीच लेबनान के नेताओं का गुस्सा ईरान पर फूटा है। लेबनानी नेताओं का कहना है कि ईरान को लेबनान की धरती पर ‘प्रॉक्सी’ प्रोजेक्ट बंद करना चाहिए।
ईरान की कड़ी आलोचना की
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने शुक्रवार को लेबनान सरकार और इजरायल के बीच हुए नए सीजफायर समझौते का विरोध करने के लिए ईरान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि तेहरान को वाशिंगटन के साथ बातचीत में लेबनान का इस्तेमाल मोलभाव करने वाले हथियार के तौर पर नहीं करना चाहिए।
दरअसल, ईरान के पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा कि अगर इजरायल लेबनान से अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाता है, तो इलाके में शांति नहीं होगी। ऐसे में अमेरिकी मीडिया को दिए इंटरव्यू में राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा, "हमारे देश में दखल देना आपका (ईरान का) काम नहीं है। मैं इस बयान को पूरी तरह से खारिज करता हूं, क्योंकि हमारे लोग मारे जा रहे हैं। हमारे घर तबाह किए जा रहे हैं।"
समझौता लेबनान तक बढ़ाया जाना चाहिए
इसके अलावा, एक अन्य बयान में प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने लेबनान के लोगों से अपने देश के हित को सबसे पहले रखने की अपील की और कहा कि लेबनान दूसरों के लिए लड़ाई का मैदान नहीं रहना चाहिए। लेबनान के शीर्ष नेतृत्व का कहना है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध को खत्म करने के लिए वाशिंगटन के साथ बातचीत में तेहरान उनके देश को मोलभाव करने का जरिया समझ रहा है। ईरान ने मांग की है कि कोई भी पक्का समझौता लेबनान तक बढ़ाया जाना चाहिए।
लेबनान के कई हिस्सों पर हमला किया
यह कमेंट तब आया, जब इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के कई हिस्सों पर हमला किया और नौ गांवों को खाली करने की चेतावनी जारी की। इजरायल और ईरान के समर्थन वाले उग्रवादी समूह हिज्बुल्लाह के बीच तीन महीने से युद्ध जारी है। इस युद्ध में बेघर हुए हजारों लोगों ने इनमें से एक गांव में पनाह ली हुई है। सरकारी न्यूज एजेंसी ने बताया कि इन हमलों में दक्षिणी लेबनान के छह स्थानों पर नौ लोग मारे गए।