
भैसाली मैदान में चल रही छावनी रामलीला में इस बार रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले जलते हुए अलग दिखाई देंगे। रावण के पुतले में मुकुट और छाती पर एलईडी लाइटें फिट की जाएंगी, साथ ही पुतले में फोल्ड अनार लगाए जाएंगे। ये अनार रिमोर्ट से चलेंगे। पुतलों में आग लगाए जाने से पहले अनार जलेंगे। छावनी रामलीला में रावण का पुतला 100 फुट, मेघनाद का 90 और कुंभकर्ण का 80 फुट का बनाया जा रहा है। चार पीढ़ियों से छावनी रामलीला के पुतले बनाने वाले मुस्लिम परिवार के लोग खुशी-खुशी रावण, मेघनाद व कुंभकर्ण के पुतले बनाते हैं। भैसाली मैदान में पुतले तैयार कर रहे आसिफ का कहना है कि जब दशहरे के दिन मेला भरता है और तीन पुतलों में आग लगाए जाने पर लोग खुश होते हैं तो हमें भी बहुत खुशी मिलती है। आसिफ ने बताया कि इस बार रावण व अन्य पुतले अलग दिखाई देंगे।
रावण के मुकुट व छाती पर बहुत सारी एलईडी लाइटें लगाई जा रही हैं और पुतलों में बिजली के फोल्ड अनार फिट किए गए हैं, जो रिमोर्ट से जलेंगे। पहले अनार जलेंगे और फिर तीनों पुतलों में आग लगेगी। इस बार रावण का 100, मेघनाद का 90 व कुंभकर्ण का 80 फुट का पुतला होगा, जिसका विजयादशी के दिन दहन होगा। ऐसे पुतले पहली बार बनाए जा रहे हैं। आसिफ ने बताया कि हिन्दुओं के धार्मिक कार्यक्रम में सहायता करना उनका खानदानी काम है। मोहम्मद असलम के नेतृत्व में खुर्रम, अकरम, सलमान, असब व आसिफ हर साल पुतले बनाने के साथ-साथ शोभायात्रा के डोले, हरिद्वारा में जाकर कांवड़ बनाने, गणेश पूजा के लिए पंडाल आदि तैयार करने का काम लगातार कर रहे हैं।
शहर रामलीला में रावण का पुतला 80 फुट का
भैसाली मैदान में रावण व अन्य दो पुतले सबसे बड़े होते हैं। उसके बाद जिमखाना की शहर रामलीला के लिए बनाए गए पुतलों का नंबर आता है। इस बार शहर रामलीला में रावण का पुतला 80 फुट, मेघनाद व कुंभकर्ण का पुतला 70-70 फुट के होंगे। इससे कम उंचाई के पुतले बाबा मनोहर नाथ मंदिर सूरजकुंड व तोपखाना मैदान की रामलीला में होते हैं।