मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने ग्रामीण इलाकों में दहशत फैला दी है। पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर जोन में स्थित जारधोबा गांव में 12 वर्षीय आदिवासी बालक को तेंदुए ने अपना शिकार बना लिया। खेत की ओर जाते समय हुए इस हमले ने एक बार फिर मानव और वन्यजीवों के बढ़ते टकराव को उजागर कर दिया है।
खेत से झोपड़ी तक का सफर बना आखिरी रास्ता
घटना उस समय हुई जब बालक अपने माता-पिता के साथ खेत में मौजूद था। माता-पिता फसल की रखवाली कर रहे थे, जबकि दादा कुछ दूरी पर बनी झोपड़ी में थे। बच्चा उन्हें भोजन देने के लिए अकेला ही निकल पड़ा। खेत और झोपड़ी के बीच झाड़ियों में छिपे तेंदुए ने अचानक उस पर झपट्टा मारा और उसे घसीटते हुए पास के पेड़ तक ले गया।
पेड़ के नीचे मिला क्षत-विक्षत शव
जब काफी देर तक बच्चा वापस नहीं लौटा तो परिजन और ग्रामीण उसकी तलाश में जुट गए। खोजबीन के दौरान पेड़ के नीचे उसका क्षत-विक्षत शव मिला। इस दृश्य ने सभी को झकझोर कर रख दिया। गांव में चीख-पुकार मच गई और पूरे इलाके में मातम छा गया। परिजन बदहवास हालत में हैं और घटना को याद कर सिहर उठते हैं।
मौके पर पहुंची टीम, शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा
सूचना मिलने पर संबंधित विभाग की टीम तत्काल गांव पहुंची। घटनास्थल का निरीक्षण किया गया और शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। आसपास के क्षेत्र में गश्त बढ़ाई गई है और ग्रामीणों को सावधानी बरतने की अपील की गई है, ताकि किसी अन्य अनहोनी से बचा जा सके।
ग्रामीणों में आक्रोश, सुरक्षा पर उठे सवाल
गांव के लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पहले भी वन्यजीवों की आवाजाही देखी जाती रही है, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। ग्रामीणों ने निगरानी बढ़ाने, चेतावनी संकेत लगाने और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त गश्त की मांग की है। उनका मानना है कि यदि समय रहते कदम उठाए जाते, तो शायद इस मासूम की जान बचाई जा सकती थी।
बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष बना चिंता का कारण
यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि जंगलों से सटे गांवों में इंसानों और जंगली जानवरों के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों का सिमटना और भोजन की तलाश में जानवरों का आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आना ऐसी घटनाओं को जन्म दे रहा है। ग्रामीणों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाना अब बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।