मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में चीता परियोजना अब किसानों के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। कूनो नेशनल पार्क से भटके पांच चीतों का झुंड बीते कुछ दिनों से शहर से लगे गांवों में आतंक मचाए हुए है। खेतों में डेरा जमाए ये चीते न सिर्फ फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि मवेशियों को भी अपना शिकार बना रहे हैं। किसानों को खेतों में जाने से रोका जा रहा है, जिससे प्याज जैसी महत्वपूर्ण फसलें बर्बाद हो रही हैं। भीषण गर्मी में ग्रामीण घरों में कैद हैं और बच्चों को भी बाहर निकलने नहीं दे रहे। कूनो और वन विभाग की मॉनिटरिंग टीम भले एक्टिव है, लेकिन ग्रामीणों में डर बना हुआ है।
सेमरी गांव में चीतों ने जमाया डेरा
सेमरी गांव की महिला किसान अनीता ने बताया कि बीते चार दिनों से चीते उनके खेतों में डेरा डाले हुए हैं। फसलें खेत में पकी पड़ी हैं लेकिन डर के चलते कोई उन्हें काटने नहीं जा पा रहा। वन विभाग ने भी अकेले खेतों में जाने से मना किया है, जिससे हालत और गंभीर हो गई है।
प्याज की फसल बर्बादी की कगार पर
गांवों में सबसे ज्यादा नुकसान प्याज की फसल को हो रहा है। खेतों में तैयार प्याज पड़ी है, लेकिन न किसान वहां जा पा रहे हैं, न ही उसे निकाल पा रहे हैं। तेज़ धूप और वक्त पर कटाई न होने से फसल खराब हो रही है।
खेतों में वन विभाग की गश्त, ट्रैकिंग जारी
कूनो और सामान्य वन विभाग की टीमें खेतों में चीतों की ट्रैकिंग कर रही हैं। वे चीते कहां-कहां जा रहे हैं, इसकी मॉनिटरिंग हो रही है, लेकिन अब तक उन्हें वहां से हटाया नहीं गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।
ग्रामीण घरों में कैदगांवों में डर का ऐसा माहौल है कि लोग घरों से निकलने से कतरा रहे हैं। बच्चों को बाहर खेलने नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी में बिजली ना होने के बावजूद वे घरों में कैद हैं, जिससे मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है।
मवेशियों पर हो रहे हमले, नुकसान की आशंका
चीतों ने अब तक कई मवेशियों को शिकार बना लिया है। किसान पहले ही महंगाई से परेशान हैं और अब मवेशियों के मारे जाने से उन्हें आर्थिक झटका भी लग रहा है। ग्रामीण प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग कर रहे हैं।