मकान व खेती की जमीन को लेकर चल रहे विवाद में युवक की गोली मारकर हत्या करने वाले आरोपियों को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कोर्ट नंबर 05) रेखा सिंह ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने प्रत्येक आरोपी पर 25 हजार रुपए का अर्थदण्ड भी लगाया है। इस मामले में कोर्ट ने तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
जमीन व मकान को लेकर रंजिश चल रही थी
अभियोजन की ओर से कोर्ट में पैरवी करने वाले एडीजीसी सहदेव सिंह और जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) राजीव शर्मा ने बताया कि 4 मार्च 2012 को युसुफ अली निवासी लद्वावाला ने पुलिस को तहरीर देते हुए बताया कि उसके भाई फारुख अली खान की कुछ लोगों को जमीन व मकान को लेकर रंजिश चल रही थी। मामलों में उसका भाई कोर्ट में पेरवी करता था। घटना वाले दिन उसका भाई फारुख गांव मथुरा थाना चरथावल से अपने घर लौट रहा था। शहर कोतवाली क्षेत्र में ललिता स्कूल के पास आरोपी नरेश व रमेश पुत्रगण कालीराम निवासी मथुरा थाना चरथावल, शाहबाज खान उर्फ शैलू, राशिद निवासी गांव मुबारिकपुर थाना मन्सूरपुर, शौकीन, वसीम निवासीगण मोहल्ला लद्वावाला व अजमत निवासी शाहबुद्दीनपुर रोड ने एक राय होकर गोली मारकर हत्या कर दी।
मामले में 12 गवाह पेश किए गए
पुलिस ने इस मामले में नामजद अभियोग पंजीकृत कर विवेचना के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश की।एडीजीसी सहदेव सिंह ने बताया कि इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कोर्ट नम्बर 5) रेखा सिंह की कोर्ट में हुई। अभियोजन की ओर से ने मामले में 12 गवाह पेश किए गए, जिनमें से कुछ को पक्षद्रोही भी घोषित किया गया। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सुनवाई करते हुए सत्र न्यायालय नंबर पाँच की पीठासीन अपर सत्र न्यायाधीश रेखा सिंह ने दोनों सगे भाई नरेश, रमेश एवं शाहबाज खान व राशिद को हत्या के मामले में दोषी माना और उनकी सजा के प्रश्न पर सुनवाई करते हुए चारों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने प्रत्येक आरोपी पर 25 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया है। कोर्ट ने मामले में तीन आरोपी शौकीन, वसीम व अजमत को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।