
Lifestyle Tips : हम में से ज़्यादातर लोग सफेद या भूरे रंग के अंडे खाने के आदी हैं, लेकिन कुछ खास नस्लों की मुर्गियाँ नीले या हरे रंग के अंडे भी देती हैं. ये अंडे देखने में जितने आकर्षक होते हैं, उतनी ही उत्सुकता इनके पोषण और सेहत पर असर को लेकर भी होती है. क्या इनका रंग इन्हें सामान्य अंडों से बेहतर बनाता है? क्या इनमें ज़्यादा प्रोटीन होता है? आइए, जानते हैं इनके पीछे का विज्ञान और स्वास्थ्य से जुड़ी सच्चाई.
नीले या हरे अंडे देने वाली मुर्गियाँ आमतौर पर विशेष नस्लों की होती हैं, जैसे अराकाना (Araucana), अमेरिकाना (Ameraucana) या ईस्टर एगर (Easter Egger). इन अंडों का रंग एक आनुवंशिक प्रक्रिया का परिणाम होता है और इसका सीधा संबंध अंडे के छिलके से है, न कि उसके अंदर के पोषक तत्वों से.
अगर बात करें प्रोटीन की मात्रा की, तो वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार सफेद, भूरे, नीले या हरे अंडों में प्रोटीन की मात्रा लगभग समान होती है. औसतन एक मध्यम आकार का अंडा लगभग 6–7 ग्राम प्रोटीन देता है. चाहे अंडे का छिलका किसी भी रंग का हो, अंदर मौजूद सफेदी (एग वाइट) और पीली जर्दी (योल्क) में पोषक तत्व एक जैसे ही होते हैं.
स्वास्थ्य के लिहाज से नीले और हरे अंडों का कोई खास लाभ सफेद या भूरे अंडों के मुकाबले नहीं होता — बशर्ते मुर्गी को संतुलित और प्राकृतिक आहार दिया गया हो. दरअसल, अंडे की पौष्टिकता का ज़्यादा असर मुर्गी की खुराक और पालन-पोषण के तरीके पर होता है, न कि अंडे के रंग पर.
कुछ लोग यह मानते हैं कि रंगीन अंडे ज़्यादा ऑर्गेनिक या प्राकृतिक होते हैं, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है. अगर मुर्गियाँ खुले वातावरण में, बिना एंटीबायोटिक्स और हार्मोन के पाली गई हैं, तो उनके अंडे निश्चित रूप से स्वास्थ्य के लिए बेहतर माने जाते हैं — चाहे उनका रंग कुछ भी हो.
नीला या हरा अंडा देखने में भले ही अलग हो, लेकिन पोषण के मामले में ये सामान्य अंडों के बराबर ही होते हैं. इसलिए अगर आप अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहते हैं, तो अंडे का रंग नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और स्रोत पर ध्यान देना ज़रूरी है. अच्छी खुराक, साफ-सफाई और प्राकृतिक पालन से प्राप्त अंडे ही असल में सेहत के लिए सबसे फायदेमंद होते हैं.