दुनिया भर में तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी की मांग तेजी से बढ़ रही है। एशियाई देशों में गैस खपत बढ़ने के साथ-साथ यूरोप भी सर्दियों से पहले अपने गैस भंडार भरने में जुटा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलएनजी की कीमतों में तेज उछाल की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में एलएनजी के दाम तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंच सकते हैं।
30 फीसदी तक बढ़ सकते हैं दाम
एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक एशियाई एलएनजी बेंचमार्क कीमत इस साल की तीसरी और चौथी तिमाही में बढ़कर 25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा स्तर से 30 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी होगी। अगर ऐसा होता है तो साल 2023 के बाद पहली बार गैस इतनी महंगी हो जाएगी। उस समय रूस से गैस आपूर्ति प्रभावित होने के बाद यूरोप ने बड़े पैमाने पर एलएनजी खरीदी थी।
भारत पर क्यों बढ़ी चिंता?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में एलएनजी आयात करता है। देश में बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, पेट्रोकेमिकल, स्टील और सीमेंट जैसे कई सेक्टर गैस पर निर्भर हैं। एलएनजी महंगी होने पर इन उद्योगों की लागत बढ़ेगी। इसका असर उत्पादन खर्च पर पड़ेगा और अंततः महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है। आम लोगों को भी गैस और अन्य जरूरी सेवाओं की कीमतों में असर महसूस हो सकता है।
ये भी पढ़ें : Virat Kohli बने देश के सबसे बड़े ब्रांड स्टार, Shah Rukh और Dhoni भी रह गए पीछे
गर्मी और यूरोप की मांग बढ़ाएगी दबाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि जून और जुलाई के दौरान एशिया के कई हिस्सों में सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ने की संभावना है। इससे एयर कंडीशनिंग और बिजली की मांग बढ़ेगी, जिसके लिए गैस की खपत भी बढ़ सकती है। दूसरी ओर यूरोप के गैस भंडार अभी पिछले साल की तुलना में काफी कम हैं। इसलिए वहां भी बड़ी मात्रा में एलएनजी खरीद होने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक मांग और बढ़ेगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य भी बना चिंता का कारण
ऊर्जा बाजार की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बनी हुई है। कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े गैस निर्यातक देशों की आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है। यदि इस क्षेत्र में किसी तरह का व्यवधान बढ़ता है तो एलएनजी सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इससे कीमतों पर और दबाव बढ़ने की आशंका है।
कई क्षेत्रों में होता है इस्तेमाल
एलएनजी का उपयोग सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल उर्वरक, रसायन, प्लास्टिक, स्टील, सीमेंट और रिफाइनरी उद्योगों में बड़े पैमाने पर होता है। इसके अलावा बसों, ट्रकों, जहाजों और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी इसका उपयोग बढ़ रहा है। यही वजह है कि एलएनजी की कीमतों में किसी भी बड़े बदलाव का असर सीधे उद्योगों, बाजार और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।