मध्य प्रदेश सिंचाई क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज करने जा रहा है। कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र में बन रही देश की सबसे लंबी जल सुरंग अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। करीब 11.952 किलोमीटर लंबी इस सुरंग का केवल दो मीटर निर्माण कार्य शेष है। परियोजना पूरी होने के बाद बरगी बांध का पानी बिना किसी पंप के विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा, जिससे छह जिलों के हजारों किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलेगी।
अंतिम चरण में पहुंचा देश की सबसे लंबी जल सुरंग का निर्माण
कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र में निर्माणाधीन जल सुरंग का काम अब अंतिम ब्रेकथ्रू की स्थिति में है। लगभग 11.952 किलोमीटर लंबी यह सुरंग देश और मध्य प्रदेश की सबसे लंबी जल सुरंग मानी जा रही है। परियोजना के तहत अब केवल दो मीटर खुदाई का कार्य बाकी है। इसके पूरा होते ही बरगी बांध का पानी प्राकृतिक ढाल के माध्यम से विंध्य अंचल तक पहुंच सकेगा। इसके लिए किसी प्रकार की पंपिंग व्यवस्था की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे जल परिवहन अधिक किफायती और ऊर्जा की बचत वाला बनेगा।
छह जिलों के 1450 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ
परियोजना के पूरा होने के बाद जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा जिले के लगभग 1450 गांवों को सिंचाई सुविधा मिलने का रास्ता खुलेगा। इसके जरिए करीब 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि तक नर्मदा का पानी पहुंचेगा। योजना के अनुसार अक्टूबर 2026 से किसानों को पानी उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। सुरंग के साथ करीब 12 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण भी किया गया है, जिससे जल वितरण और अधिक प्रभावी होगा।
इंजीनियरिंग चुनौतियों के बीच पूरा हुआ बड़ा निर्माण कार्य
इस परियोजना को वर्ष 2008 में स्वीकृति मिली थी और 2011 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। निर्माण के दौरान भूगर्भीय परिस्थितियां, ऊंचा भूजल स्तर, सिंकहोल जैसी प्राकृतिक चुनौतियां, कोरोना काल और निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों ने काम की गति को प्रभावित किया। सुरंग के निर्माण के लिए लगभग 30 मीटर गहराई तक खुदाई की गई और जर्मनी की टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का उपयोग किया गया। चट्टानों को काटने के दौरान मशीन के 56 कटर कई बार बदले गए। सुरक्षा के मद्देनजर सुरंग के ऊपर लगभग 20 मीटर चौड़ी भूमि का अस्थायी अधिग्रहण भी किया गया।
लागत और समय दोनों बढ़े, लेकिन परियोजना अंतिम मुकाम पर
परियोजना की शुरुआती अनुमानित लागत 799 करोड़ रुपये थी, लेकिन विभिन्न तकनीकी और परिस्थितिजन्य कारणों से यह बढ़कर लगभग 1442 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। निर्माण कार्य भी तय समय से आगे बढ़ा। सुरंग का डाउन स्ट्रीम हिस्सा पहले ही पूरा हो चुका था, जबकि अप स्ट्रीम कार्य को पहले वर्ष 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। बाद में समय सीमा कई बार बढ़ाई गई और अब वर्ष 2026 में यह परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है।
प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था में जुड़ने जा रहा नया अध्याय
इस जल सुरंग के शुरू होने के बाद विंध्य क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए अधिक भरोसेमंद जल उपलब्ध हो सकेगा। प्राकृतिक ढाल के माध्यम से पानी पहुंचाने की यह व्यवस्था ऊर्जा की बचत के साथ संचालन लागत भी कम करेगी। कृषि उत्पादन बढ़ाने, सिंचाई क्षेत्र का विस्तार करने और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में यह परियोजना मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल होने जा रही है।