भोपाल — मध्यप्रदेश की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने ‘लव जिहाद’ के संदर्भ में एक विवादित बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि बेटी परिवार की बात न माने और किसी अन्य धर्म के व्यक्ति के साथ जुड़ने का प्रयास करे तो उसके प्रति सख्ती बरतनी चाहिए—even “टांगे तोड़ने” तक का जिक्र किया। उनके इस कथन ने महिला अधिकारों, कानून और पारिवारिक संस्कारों पर नई बहस छेड़ दी है। बयान के बाद समाज के अलग-अलग तबके और कानूनी विशेषज्ञों ने प्रतिक्रिया दी है।
बयान और उसकी भाषा
साध्वी ने कहा कि जो लड़कियाँ “संस्कारों” से नहीं मानतीं और माता-पिता की सलाह न मानें, उन्हें ताड़ना देनी पड़ती है। उन्होंने माता-पिता को अपनी संतान के भले के लिए कड़े कदम उठाने की बात कही और परिवार को सही मार्ग पर लाने का समर्थन किया। यह भाषा उग्र और हिंसात्मक मानी जा रही है।
कानूनी और सामाजिक प्रतिक्रिया
कई नागरिक और महिला-अधिकार समूह इस टिप्पणी को कानून की अवहेलना व उत्तरदायित्वहीन मान रहे हैं। आलोचक कहते हैं कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संविधानिक अधिकारों का उल्लंघन किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं। जबकि कुछ समर्थक इसे “संस्कारों की रक्षा” के रूप में देख रहे हैं — जिससे विभाजन और बहस गहराई है।