कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में 195.50 रुपये की बढ़ोतरी के बाद सरकार ने अपना पक्ष साफ किया है। सरकार का कहना है कि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम पूरी तरह बाजार के आधार पर तय होते हैं और इन पर सरकार का सीधा नियंत्रण नहीं होता। इन सिलेंडरों का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटल, ढाबों और उद्योगों में होता है, इसलिए इनके दाम हर महीने अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से बदलते रहते हैं।
आम उपभोक्ता पर असर सीमित बताया गया
सरकार के मुताबिक देश में कुल एलपीजी खपत में कमर्शियल सिलेंडर की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से भी कम है। ऐसे में इनकी कीमत बढ़ने का सीधा असर आम घरेलू उपभोक्ताओं पर ज्यादा नहीं पड़ता। सरकार ने दावा किया है कि घरेलू रसोई पर फिलहाल इस बढ़ोतरी का बोझ नहीं डाला गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार बना वजह
सरकार ने इस बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक हालात को जिम्मेदार ठहराया है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के चलते एलपीजी सप्लाई का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है। बताया गया है कि दुनिया की करीब 20 से 30 प्रतिशत एलपीजी सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। इस वजह से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा और कीमतों में तेजी आई।
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तेल कंपनियां उठा रही हैं नुकसान
सरकार का यह भी कहना है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अभी भी घरेलू सिलेंडर पर भारी नुकसान झेल रही हैं। हर सिलेंडर पर करीब 380 रुपये का घाटा उठाया जा रहा है। अनुमान है कि मई के अंत तक यह नुकसान 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है। पिछले साल भी कुल नुकसान का बड़ा हिस्सा सरकार और कंपनियों ने मिलकर उठाया था ताकि आम जनता पर सीधा असर न पड़े।
पड़ोसी देशों से तुलना भी पेश की गई
सरकार ने भारत में एलपीजी कीमतों की तुलना पड़ोसी देशों से भी की है। पाकिस्तान, श्रीलंका और नेपाल में गैस की कीमतें भारत के मुकाबले ज्यादा बताई गई हैं। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि भारत में अब भी गैस अपेक्षाकृत सस्ती है।
बड़े शहरों में बढ़े दाम
नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 1883 रुपये से बढ़कर 2078.50 रुपये हो गया है। कोलकाता में इसकी कीमत 2208 रुपये, मुंबई में 2031 रुपये और चेन्नई में 2246.50 रुपये तक पहुंच गई है। सिर्फ एक महीने में सिलेंडर की कीमतों में 300 रुपये से ज्यादा का इजाफा हो चुका है।
आगे क्या असर पड़ेगा?
हालांकि सरकार ने आम उपभोक्ता पर असर सीमित बताया है, लेकिन कमर्शियल गैस महंगी होने से होटल और रेस्टोरेंट के खर्च बढ़ सकते हैं। इसका असर अप्रत्यक्ष रूप से आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है।