मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव ने तेल सप्लाई पर असर डालना शुरू कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजार में गिरावट ने गैस संकट की आशंका बढ़ा दी है।
सरकार एक्शन मोड में
इन हालातों के बीच भारत सरकार ने एलपीजी सप्लाई को सुचारू बनाए रखने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। खास तौर पर 5 किलो वाले ‘छुटकू’ सिलेंडर की सप्लाई बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की किल्लत न हो। यह कदम खासकर कम आय वर्ग और प्रवासी मजदूरों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
रिकॉर्ड बिक्री के आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 23 मार्च से अब तक 13 लाख से ज्यादा 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर बेचे जा चुके हैं। इनकी रोजाना बिक्री 1 लाख यूनिट से भी ऊपर पहुंच गई है। इससे साफ है कि छोटे सिलेंडर की मांग तेजी से बढ़ रही है और सरकार इस मांग को पूरा करने में जुटी हुई है।
PNG कनेक्शन में भी तेजी
सिर्फ एलपीजी ही नहीं, बल्कि पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG कनेक्शन के विस्तार पर भी सरकार जोर दे रही है। मार्च से अब तक 4,24,000 से अधिक नए कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इसके साथ ही करीब 30,000 उपभोक्ताओं ने अपने पुराने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर भी किए हैं।
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रणनीतिक तैयारी का हिस्सा
सरकार की यह रणनीति भविष्य के संभावित संकट को ध्यान में रखकर बनाई गई है। अगर होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित होती है, तो एलपीजी और तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में छोटे सिलेंडर और PNG कनेक्शन का विस्तार एक बैकअप प्लान के तौर पर देखा जा रहा है।
तनाव से बढ़ सकता है संकट
पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता के विफल होने के बाद हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समुद्री रूट पर सख्ती के संकेत और ईरान की चेतावनी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इससे तेल-गैस संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।
भारत की तैयारी मजबूत
हालांकि इन वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत अपनी घरेलू जरूरतों को लेकर सतर्क है। एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने और वैकल्पिक विकल्प बढ़ाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। इससे आम लोगों पर संकट का असर कम करने की कोशिश की जा रही है।