घरेलू एलपीजी सिलेंडर एक बार फिर महंगा हो गया है। 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद अब सामान्य उपभोक्ताओं के लिए सिलेंडर 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये का हो गया है। इससे पहले 7 मार्च को भी गैस सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। यानी सिर्फ 3 महीने के भीतर दूसरी बार रसोई का बजट बढ़ा है।
सरकार ने बताई वजह
सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों के कारण गैस की लागत काफी बढ़ गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेज उछाल आया है। इसी वजह से घरेलू बाजार में भी कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। मंत्रालय का दावा है कि मौजूदा हालात में यह फैसला जरूरी था।
उज्ज्वला योजना वालों को राहत
हालांकि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अभी भी राहत मिल रही है। उनके लिए सब्सिडी वाला सिलेंडर 642 रुपये में उपलब्ध है। सरकार का कहना है कि गरीब परिवारों को राहत देने के लिए सब्सिडी व्यवस्था जारी रखी गई है। इससे करोड़ों परिवारों पर बढ़ती कीमतों का पूरा असर नहीं पड़ेगा।
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पड़ोसी देशों से सस्ता दावा
सरकार ने कुछ देशों के आंकड़े जारी करते हुए कहा है कि भारत में गैस अभी भी कई देशों के मुकाबले सस्ती है। बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर भारत में 942 रुपये का है, जबकि पाकिस्तान में इसकी कीमत 1046 रुपये, नेपाल में 1207 रुपये, बांग्लादेश में करीब 1225 रुपये और श्रीलंका में 1241 रुपये बताई गई है। सरकार का कहना है कि भारतीय उपभोक्ता अब भी पड़ोसी देशों के मुकाबले कम कीमत चुका रहे हैं।
विकसित देशों से भी तुलना
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत करीब 1755 रुपये, ऑस्ट्रेलिया में 1765 रुपये और कनाडा में 2411 रुपये के आसपास है। सरकार का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें काफी ज्यादा होने के बावजूद भारत में उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम दर पर गैस उपलब्ध कराई जा रही है।
हर सिलेंडर पर नुकसान का दावा
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक एक घरेलू सिलेंडर की सप्लाई लागत अब 1600 रुपये से ज्यादा पहुंच चुकी है। ऐसे में प्रत्येक सिलेंडर पर करीब 700 रुपये की अंडर-रिकवरी हो रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार घरेलू एलपीजी पर अंडर-रिकवरी का बोझ पिछले वर्ष लगभग 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया। ऐसे में सरकार का कहना है कि कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बावजूद उपभोक्ताओं को अभी भी अंतरराष्ट्रीय लागत से काफी कम कीमत पर गैस उपलब्ध कराई जा रही है।