पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब सीधे भारत की रसोई तक पहुंचता दिख रहा है। कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से देश में एलपीजी का स्टॉक तेजी से घट रहा है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सीमित गैस को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए। इसी वजह से अब एक बड़ा बदलाव करने पर विचार किया जा रहा है, जिससे हर घर तक गैस की सप्लाई बनी रहे और संकट को कुछ हद तक संभाला जा सके।
कम गैस वाले सिलेंडर पर विचार
रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार और कंपनियां 14.2 किलो के घरेलू सिलेंडर में गैस की मात्रा घटाकर करीब 10 किलो करने का विकल्प देख रही हैं। इसका मकसद यह है कि कम गैस देकर ज्यादा घरों तक सप्लाई पहुंचाई जा सके। कंपनियों का मानना है कि छोटे परिवार के लिए 10 किलो गैस करीब एक महीने तक चल सकती है। ऐसे में संकट के समय यह तरीका राहत देने वाला साबित हो सकता है और गैस की उपलब्धता को संतुलित रखा जा सकता है।
कीमत भी बदलेगी, नए नियम बनेंगे
अगर यह योजना लागू होती है तो सिलेंडर पर एक अलग स्टिकर लगाया जाएगा, जिससे ग्राहकों को पता चल सके कि उसमें कम गैस है। इसके साथ ही कीमत भी गैस की मात्रा के हिसाब से तय की जाएगी। हालांकि इसके लिए बॉटलिंग प्लांट में तकनीकी बदलाव करने होंगे और कुछ जरूरी मंजूरी भी लेनी होगी। यानी यह फैसला तुरंत लागू नहीं होगा, लेकिन हालात बिगड़े तो इसे जल्दी लागू किया जा सकता है।
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लोगों में बढ़ सकता है भ्रम और विरोध
कंपनियों को इस बात की भी चिंता है कि अचानक सिलेंडर में गैस की मात्रा कम करने से लोगों में भ्रम फैल सकता है। कई लोग इसे कीमत बढ़ने या धोखे के रूप में भी देख सकते हैं। खासकर चुनावी राज्यों में यह मुद्दा संवेदनशील हो सकता है। इसलिए सरकार और कंपनियां इस फैसले को लागू करने से पहले हर पहलू पर विचार कर रही हैं, ताकि जनता में असंतोष न फैले और व्यवस्था भी बनी रहे।
आयात पर निर्भरता बनी बड़ी वजह
भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। पहले खाड़ी देशों से करीब 90 प्रतिशत गैस आती थी, लेकिन मौजूदा हालात में सप्लाई प्रभावित हो गई है। अभी देश में नए शिपमेंट नहीं आ रहे हैं और जो स्टॉक है, वह तेजी से घट रहा है। पिछले हफ्ते जो गैस आई, वह केवल एक दिन की खपत के बराबर थी। इससे साफ है कि स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है और आने वाले समय में दबाव और बढ़ सकता है।
घरेलू खपत पर भी दिख रहा असर
देश में रोजाना करीब 93,500 टन एलपीजी की खपत होती है, जिसमें से लगभग 80,400 टन गैस घरों में इस्तेमाल होती है। हाल के आंकड़ों के अनुसार खपत में करीब 17 प्रतिशत की गिरावट भी दर्ज की गई है, जो इस बात का संकेत है कि लोग पहले से ही बचत करने लगे हैं। सरकार ने पहले कमर्शियल उपभोक्ताओं की सप्लाई रोकी थी, लेकिन अब कुछ हिस्से में बहाल कर दी गई है। ऐसे में घरेलू और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों पर दबाव बना हुआ है और आने वाले समय में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।