साल 2026 में एलपीजी उपभोक्ताओं को लगातार बढ़ती कीमतों और सप्लाई संकट का सामना करना पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़े तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े असर ने गैस बाजार को पूरी तरह प्रभावित कर दिया। खासकर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़े संघर्ष तथा होर्मुज स्ट्रेट में पैदा हुई बाधाओं ने एलपीजी की उपलब्धता और कीमतों दोनों पर दबाव बढ़ा दिया। इसका असर घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के उपभोक्ताओं पर देखने को मिला।
घरेलू सिलेंडर भी नहीं बच सका महंगाई से
करीब एक वर्ष तक स्थिर रहने के बाद घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत लंबे समय तक 853 रुपये पर बनी हुई थी। हालांकि मार्च के पहले सप्ताह में तेल कंपनियों ने अचानक 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी, जिसके बाद इसकी कीमत 913 रुपये तक पहुंच गई। हालांकि कमर्शियल सिलेंडर की तुलना में घरेलू उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम झटका लगा, लेकिन बढ़ी हुई कीमतों ने परिवारों का बजट जरूर प्रभावित किया।
सप्लाई संकट ने बढ़ाईं उपभोक्ताओं की मुश्किलें
कीमतों के साथ-साथ गैस की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती बनकर सामने आई। होर्मुज स्ट्रेट में बाधा आने से खाड़ी देशों से गैस आपूर्ति प्रभावित हुई और घरेलू बाजार में दबाव बढ़ गया। कई क्षेत्रों में सिलेंडर बुकिंग और डिलीवरी की प्रक्रिया लंबी हो गई। उपभोक्ताओं को निर्धारित समय से अधिक इंतजार करना पड़ा, जबकि नई सत्यापन प्रक्रियाओं और डिलीवरी नियमों ने भी लोगों की परेशानियां बढ़ाईं। सरकार और तेल कंपनियों ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए कई आपात कदम उठाए।
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कमर्शियल सिलेंडर पर पड़ा सबसे बड़ा असर
सबसे ज्यादा दबाव होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और छोटे कारोबारों पर पड़ा है, जो कमर्शियल एलपीजी पर निर्भर हैं। दिसंबर 2025 में दिल्ली में 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर 1,580.50 रुपये का था, जो मात्र पांच महीनों में बढ़कर 3,113.50 रुपये तक पहुंच गया। यानी कीमत में 1,533 रुपये की भारी बढ़ोतरी हुई। जनवरी से मई तक लगभग हर महीने दाम बढ़े और कारोबारियों की लागत लगातार बढ़ती चली गई।
मई और जून में रिकॉर्ड बढ़ोतरी ने बढ़ाई चिंता
कमर्शियल गैस बाजार में सबसे बड़ा झटका मई महीने में देखने को मिला, जब एक ही बार में 993 रुपये की ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई। इसके बाद जून की शुरुआत में भी 42 रुपये का इजाफा कर दिया गया। लगातार बढ़ती कीमतों ने छोटे और मध्यम कारोबारों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक ऊर्जा संकट जल्द नहीं थमा तो आने वाले महीनों में एलपीजी बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।