घरेलू गैस उपभोक्ताओं के लिए जून की शुरुआत कई अहम बदलाव लेकर आ रही है। सरकार और गैस वितरण कंपनियां एलपीजी के दुरुपयोग, जमाखोरी और दोहरे कनेक्शनों पर रोक लगाने के लिए नए नियम लागू करने की तैयारी में हैं। खासतौर पर उन परिवारों पर नजर रखी जा रही है, जिनके पास पीएनजी और एलपीजी दोनों सुविधाएं मौजूद हैं। नए प्रावधानों का असर लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
एक परिवार, एक गैस कनेक्शन पर जोर
नए नियमों के तहत उन परिवारों की पहचान की जा रही है, जिनके घर में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और एलपीजी दोनों कनेक्शन सक्रिय हैं। सरकार का उद्देश्य गैस आपूर्ति को अधिक व्यवस्थित बनाना और घरेलू सिलेंडरों के दुरुपयोग को रोकना है। ऐसे उपभोक्ताओं को निर्धारित समय के भीतर एक विकल्प चुनने के लिए कहा जा सकता है। यदि किसी क्षेत्र में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है और उसका उपयोग किया जा रहा है, तो एलपीजी कनेक्शन को लेकर नई शर्तें लागू हो सकती हैं।
रिफिल बुकिंग पर बढ़ी निगरानी
गैस सिलेंडरों की अनावश्यक खपत और कालाबाजारी रोकने के लिए रिफिल बुकिंग नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। शहरी क्षेत्रों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की दो बुकिंग के बीच न्यूनतम अवधि बढ़ाकर 25 दिन की जा रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अवधि 45 दिन तक हो सकती है। इसका उद्देश्य वास्तविक जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
सब्सिडी और नए कनेक्शन पर असर
घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह एक वर्ष में 12 रियायती सिलेंडर मिलते रहेंगे। इसके बाद अतिरिक्त सिलेंडरों के लिए बाजार मूल्य के अनुसार भुगतान करना होगा। वहीं नए एलपीजी कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को संशोधित सुरक्षा जमा राशि, रेगुलेटर, पाइप और इंस्टॉलेशन शुल्क का भुगतान करना पड़ सकता है।
PNG लेने वालों के लिए नई व्यवस्था
पीएनजी कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को निर्धारित अवधि के भीतर अपने एलपीजी कनेक्शन की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। हालांकि जरूरत पड़ने पर एलपीजी कनेक्शन को दोबारा सक्रिय कराने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। यह व्यवस्था उन लोगों के लिए राहत मानी जा रही है, जो भविष्य में ऐसे क्षेत्रों में स्थानांतरित हो सकते हैं जहां पीएनजी सेवा उपलब्ध नहीं है।
डेटाबेस एकीकरण से बढ़ेगी पारदर्शिता
गैस वितरण कंपनियों ने अपने डिजिटल रिकॉर्ड को आपस में जोड़ने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इससे दोहरे कनेक्शन, फर्जी बुकिंग और दुरुपयोग की पहचान आसान होगी। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से गैस वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी और वास्तविक उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।