ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा सप्लाई पर साफ दिख रहा है। एलपीजी की उपलब्धता को लेकर बड़ी चिंता सामने आई है। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार देश में एलपीजी सप्लाई पूरी तरह सामान्य होने में 3 से 4 साल का समय लग सकता है। इससे आम लोगों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि इसका सीधा असर घरेलू जरूरतों पर पड़ता है।
सरकार की प्राथमिकता बनी सप्लाई
सरकार फिलहाल एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई को बनाए रखने पर फोकस कर रही है। अधिकारी ने बताया कि कोशिश की जा रही है कि हर घर तक गैस सिलेंडर की सप्लाई बिना रुकावट पहुंचती रहे। अगर कहीं कमी आती है तो उसे तुरंत दूर करने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
सप्लाई के प्रमुख स्रोत हुए प्रभावित
अधिकारी ने बताया कि इस संकट की सबसे बड़ी वजह जरूरी सप्लाई स्रोतों का बंद होना है। हालांकि यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि उत्पादन रुका है या संसाधन खत्म हो रहे हैं, लेकिन सप्लायर्स के अनुसार स्थिति सामान्य होने में लंबा समय लग सकता है। इससे भविष्य में भी सप्लाई पर दबाव बना रह सकता है।
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होर्मुज मार्ग पर निर्भरता बनी बड़ी वजह
भारत की एलपीजी सप्लाई का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए आता है। करीब 90 प्रतिशत गैस इसी रास्ते से पहुंचती है। ऐसे में इस क्षेत्र में जारी तनाव और अस्थिरता का सीधा असर भारत की सप्लाई चेन पर पड़ रहा है।
सीजफायर के बावजूद बनी अनिश्चितता
हालांकि ईरान में फिलहाल संघर्ष के बाद सीजफायर लागू है, लेकिन क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। होर्मुज को लेकर जारी विवाद ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। यही वजह है कि सप्लाई में रुकावट का खतरा अभी भी बना हुआ है।
लोगों पर पड़ सकता है असर
अगर सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो इसका असर आम लोगों की रसोई पर पड़ सकता है। कीमतों में बढ़ोतरी और उपलब्धता में कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इससे घरेलू बजट पर भी दबाव बढ़ सकता है।
आगे की राह चुनौतीपूर्ण
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इस संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक सप्लाई स्रोतों की तलाश करनी होगी। साथ ही ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
सतर्कता ही सबसे बड़ा उपाय
फिलहाल सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सप्लाई को स्थिर रखने की कोशिश कर रही है। लेकिन आने वाले समय में यह संकट कितना गहराएगा, यह वैश्विक हालात पर निर्भर करेगा।