Meerut News: लखनऊ में आतंकी गतिविधियों में पकड़ा गए मास्टरमाइंड साकिब की गिरफ्तारी के बाद एटीएस को जांच में लगातार चौंकाने वाले राज मिल रहे है। पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के लिए हैंडलर्स का काम करने वाले साकिब को दुबई में बैठे बिजनौर के आकिब खान ने अफगानिस्तान और पाक के कई कट्टरपंथी संगठनों से सोशल मीडिया के माध्यम से मिलवाया था और इन संगठनों के इशारे पर साकिब दहशत फैलाने के लिए स्लीपिंग मॉड्यूल तैयार कर रहा था। जांच में यह भी बात निकल कर आई है कि एके-47 और हैंड ग्रेट के साथ सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले आकिब को बिजनौर पुलिस ने क्लीन चिट दे दी थी। एटीएस की जांच के बाद इस मामले में बिजनौर में तैनात इंस्पेक्टर को निलंबित और सीओ को लाइन से संबंध किया गया है। एटीएस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है, क्योंकि साकिब को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।
नाई का करता था काम
दो अप्रैल को एटीएस ने लखनऊ से पाकिस्तान के कट्टरपंथी आतंकी संगठनों से जुड़े चार स्लीपिंग मॉड्यूल को गिरफ्तार किया था। इनमें गिरोह का मास्टर माइंड साकिब उर्फ डेविल व अबरार मेरठ के अगवानपुर गांव के रहने वाले है। जांच के दौरान एटीएस को पता चला कि पुलिस और खुफिया एजेंसियों से बचने के लिए साकिब दिखावे के लिए नाई का काम करता था। एटीएस को जांच के दौरान पता चला है कि इंस्टाग्राम के जरिए साकिब का परिचय दुबई में बैठ बिजनौर जिले के नांगल सोती थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी आकिब से संपर्क हुआ था और आकिब ने ही साकिब को पाकिस्तान के कट्टरपंथी संगठनों से सोशल मीडिया के माध्यम से मिलवाया था। इसके बाद साकिब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कई कट्टरपंथी आतंकी संगठनों से जुड़े गया था।
कौन है साकिब, कैसे आया चर्चाओं में
आकिब बिजनौर जिले के नांगल सोती थाना क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला है और वर्तमान में दुबई में रह रहा है। वर्ष-2025 में वह एटीएस के रडार पर उस समय आ गया था, जब उसने सोशल मीडिया पर एके-47 और हैंड ग्रेनेड के साथ वीडियो वायरल की थी और वीडियो कॉल के जरिए भारत में अपने साथियों के संपर्क किया था। आकिब की हथियारों के साथ वीडियो वायरल होने की जांच बिजनौर के तत्कालीन थानाध्यक्ष सत्येंद्र सिंह मलिक ने की थी। मामले की गंभीरता को ना समझते हुए थानाध्यक्ष ने वीडियो काल के माध्यम से आकिब से दुबई में बात की थी। आकिब ने पुलिस को गुमराह करते हथियारों को खिलौना बताया था।
परिजनों से भी पूछताछ कर रही
पुलिस ने बिना गहराई से जांच किए उसे क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन साकिब की गिरफ्तारी के दौरान इसका राजफाश होने पर बिजनौर के तत्कालीन थानाध्यक्ष सत्येंद्र सिंह मलिक को निलंबित और सीओ नितेश प्रताप सिंह को लाइन से संबंध कर दिया गया है। जांच में सामने आया कि दुबई में बैठा आकिब खान, साकिब का करीबी साथी है और वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के हैंडलर्स के संपर्क में है। जांच में यह बात भी निकल कर आई है कि आकिब का संबंध मेरठ और बिजनौर क्षेत्र से है और वह सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और नेटवर्क बनाने में शामिल बताया जा रहा है। खुफिया एजेंसियां इस बात की जांच भी कर रही है कि आकिब किस साल दुबई गया था और वहां पर वह आतंकी हैंडलर्स का साथ कब और कैसे मिला। इसके लिए खुफिया एजेंसियां आकिब के बिजनौर में रह रहे परिजनों से भी पूछताछ कर रही है।
धर्म के नाम पर उकसा कर हिंसा का टास्क मिला था
एटीएस की जांच में यह बात प्रकाश में आई है कि सीमा के उस पार बैठे कट्टरपंथी संगठन ओसामा बिन लादेन, बरकतुल्लाह गोरी, कश्मीर मुजाहिदीन, गजवा-ए- हिंद आदि नामों का उल्लेख कर धर्म के नाम पर साकिब और उसके गिरोह को उकसा कर हिंसा फैलाने का टास्क देते और हिंसा की वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथी संगठनों को साकिब भेजता था। इसके बदले में साकिब को क्यूआर कोड के माध्यम से रुपया मिलता है। जांच के दौरान एटीएस को साबिक के अफगानिस्तान और पाक की कट्टरपंथी संस्थाओं जुड़े होने के सबूत भी मिले है। साकिब के गिरोह में कितने लोग शामिल है और उनका आगे का टास्क क्या है। इसके लिए एटीएस साकिब को पांच दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।