
यूपी के लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस यूनिट से पहली खेप सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलों का शनिवार को फ्लैग ऑफ कर दिया गया. इस मौके पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहीं से बनी मिसाइलों के पहले बैच को हरी झंडी दिखाई. इस दौरान डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत और ब्रह्मोस के महानिदेशक जयतीर्थ आर. जोशी भी मौजूद रहे. कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि ब्रह्मोस सिर्फ भारत का नहीं, बल्कि मित्र देशों की रक्षा के लिए भी एक बेहद सक्षम हथियार है. लखनऊ यूनिट में मिसाइलों का उत्पादन, इंटीग्रेशन, टेस्टिंग और क्वालिटी चेक होता है और पहली खेप रवाना होते ही यह शहर एक ऐतिहासिक घड़ी का साक्षी बन गया है.
डीजी ब्रह्मोस ने सीएम को सौंपा 40 करोड़ का चेक
वहीं कार्यक्रम के दौरान डीजी ब्रह्मोस ने 40 करोड़ रुपये का जीएसटी चेक सौंपा, जिसे मुख्यमंत्री योगी ने दर्शाया, सीएम ने बताया कि सालाना 100 ब्रह्मोस बनेगे और भविष्य में यही संख्या बढ़कर 150 तक पहुंच सकती है. इससे जीएसटी राजस्व में भी इजाफा होगा. उन्होंने जरूरत पड़ी तो DRDO को और जमीन उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि यह सुविधा 11 मई 2025 को खोली गई थी और मात्र पांच महीनों में पहली खेप तैयार हो गई. यह गति और क्षमता उत्तर प्रदेश और देश की प्रगति का प्रमाण है.
ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत
ब्रह्मोस मिसाइल की विशेषताएं इसे अत्यंत खतरनाक और प्रभावी बनाती हैं. यह एक सुपरसोनिक मिसाइल है और आवाज़ की गति से तीन गुना (Mach 3) तक उड़ सकती है, इसलिए लक्ष्य तक बहुत तेज़ी से पहुंच जती है. इसके साथ ही इस मिसाइल की टार्गेट हिट करने की सटीकता बहुत उच्च है और इसे जमीन, समुद्र और वायु से लॉन्च किया जा सकता है. वायुसेना के सुखोई-30 से भी वर्चुअल स्ट्राइक दिखायी गयी हैं. इसमें 500 किलो तक का वारहेड लगाया जा सकता है और यह जमीन व समुद्र दोनों तरह के टार्गेट पर प्रभावशील है. पहले इसकी रेंज लगभग 290 किलोमीटर थी, जबकि नए संस्करणों में यह 400–500 किलोमीटर तक पहुंच चुकी है और 800 किलोमीटर तक की रेंज पर भी काम किया जा रहा हैं.
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देश की रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भरता मजबूत
ब्रहमोस का इस्तेमाल हाल ही के अभियानों में भी रिपोर्टेड रहा है, जहां इसके तेज़ और सटीक प्रहार से महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर हमला किया गया. लखनऊ से निर्मित मिसाइलों की डिलीवरी देश की रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भरता को और मजबूत करेगी, साथ ही स्थानीय उद्योग और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा भी मिलेगा. यह यूनिट भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और तेज डिलीवरी देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.