सुंदर चंदेल !
लखनऊ अग्निकांड: लखनऊ के अलीगंज इलाके में 22 जून को लगी भीषण आग ने 15 युवाओं की जान ले ली। यह हादसा सिर्फ आग लगने की घटना नहीं, बल्कि बरसों से चल रही लापरवाही की कहानी भी बन गया है। जिस तीन मंजिला इमारत में पेट शॉप, वेटरनरी क्लिनिक, कोचिंग सेंटर और एनीमेशन स्टूडियो चल रहा था, वह रिकॉर्ड में रेसिडेंशियल बिल्डिंग बताई जा रही है। आरोप है कि साल 2014 में इसे कमर्शियल इस्तेमाल के लिए बदल दिया गया, लेकिन जरूरी सुरक्षा नियमों का सही पालन नहीं हुआ। अब जांच में यह देखा जा रहा है कि इमारत के इस्तेमाल में बदलाव की अनुमति किस आधार पर मिली और जिम्मेदारी किसकी थी।
एक ही रास्ते ने बढ़ाई सबसे बड़ी मुश्किल
इस बिल्डिंग में आने और बाहर निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता था। आग लगने के बाद यही रास्ता सबसे पहले लपटों और धुएं की चपेट में आ गया। ऊपर की मंजिलों पर मौजूद छात्र, कर्मचारी और युवा कलाकार बाहर निकलने का रास्ता तलाशते रहे, लेकिन धुआं तेजी से फैल गया। कुछ लोग बाथरूम में छिप गए, कुछ खिड़कियों से पाइप के सहारे उतरने की कोशिश करने लगे। एक युवक ने जान बचाने के लिए खिड़की से छलांग भी लगा दी। लोगों का कहना है कि अगर इमारत में अलग इमरजेंसी एग्जिट होता, तो कई जिंदगियां बच सकती थीं।
चीखों के बीच चला रेस्क्यू ऑपरेशन
दोपहर में आग की खबर मिलते ही दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। शुरुआत में छह फायर टेंडर लगाए गए, बाद में 19 दमकल गाड़ियों, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और प्रशासन की टीमों ने मोर्चा संभाला। आग और धुएं की वजह से मुख्य रास्ते से अंदर जाना मुश्किल था। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने बगल की बिल्डिंग की दीवार तोड़कर अंदर पहुंचने का फैसला किया। हाइड्रोलिक कटर, हथौड़े और ड्रिलिंग मशीनों से दीवार में छेद किया गया। जैसे ही दीवार टूटी, काले धुएं का बड़ा गुबार बाहर निकला और बचाव अभियान और कठिन हो गया।
स्टूडियो और कोचिंग में फंसे थे युवा
दूसरी मंजिल पर हेड हॉपर स्टूडियो नाम का एनीमेशन और थ्री-डी गेम डेवलपमेंट संस्थान चल रहा था। यहां कर्मचारी काम करते थे और छात्रों को एनीमेशन व गेम डिजाइनिंग की ट्रेनिंग भी दी जाती थी। गर्मी की छुट्टियों के कारण वहां कई छात्र मौजूद थे। आग के वक्त अंदर करीब 20 से ज्यादा लोगों के फंसे होने की आशंका थी। धुएं से बचने के लिए कई युवाओं ने बाथरूम में खुद को बंद कर लिया। कुछ ने फोन करके घरवालों और दोस्तों को बताया कि वे मदद का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन धुआं इतना घना था कि कई लोग बाहर नहीं निकल सके।
पहले रेस्क्यू फिर बन गया रिकवरी ऑपरेशन
करीब तीन घंटे तक चले बचाव अभियान के दौरान बाहर खड़े परिवार अपने बच्चों की खबर के लिए रोते रहे। कई मां-बाप पुलिस और अधिकारियों से अंदर जाने की गुहार लगाते रहे। कुछ देर बाद बिल्डिंग से पहला शव बाहर निकला। फिर एक के बाद एक शव आने लगे। स्ट्रेचर कम पड़ गए और रेस्क्यू टीम को और स्ट्रेचर मंगाने पड़े। 15 युवाओं की मौत की पुष्टि के बाद पूरे इलाके में मातम पसर गया। कई घायल अस्पताल में भर्ती हैं। केजीएमयू में घायलों का इलाज चल रहा है और एक बच्चे के गंभीर रूप से घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।
अब कार्रवाई हुई लेकिन सवाल बाकी हैं
हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम छोड़कर लखनऊ पहुंचकर घटनास्थल और अस्पताल का दौरा किया। चार अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है और छह नामजद आरोपियों समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस ने बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, रामकृष्ण उपाध्याय, कृष्णा जायसवाल और तुशांक कृष्णा जायसवाल समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब इमारत में सालों से कमर्शियल गतिविधियां चल रही थीं, तो प्रशासन, विकास प्राधिकरण और फायर सेफ्टी विभाग की नजर पहले क्यों नहीं पड़ी। 15 परिवारों ने अपने बच्चे खो दिए हैं और उनके लिए सिर्फ कार्रवाई नहीं, जवाबदेही भी जरूरी है।