Lucknow Fire Tragedy: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार को एक तीन मंजिला इमारत में भीषण आग लगने से 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए। घटना के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इमारत के मालिकों सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों एवं घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री ने रद्द किए सभी कार्यक्रम
अग्निकांड की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सभी निर्धारित कार्यक्रम स्थगित कर दिए और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। घटना के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र को अलर्ट मोड पर रखा गया।
जांच के लिए एसआईटी का गठन
मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। एसआईटी को हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सात दिनों में रिपोर्ट देने का निर्देश
सरकार ने एसआईटी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह सात दिन के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करे, ताकि दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सके।
घटनास्थल पर पहुंचे सीएम योगी और राजनाथ सिंह
हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। दोनों नेताओं ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
2016 में जारी हुआ था ध्वस्तीकरण आदेश
जिस तीन मंजिला इमारत में यह हादसा हुआ, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण के आरोप में ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। हालांकि बाद में यह आदेश निरस्त कर दिया गया था।
दो महीने में रद्द हो गया था आदेश
जानकारी के अनुसार, इमारत को गिराने का आदेश जारी होने के दो महीने से भी कम समय के भीतर उसे वापस ले लिया गया। इस निर्णय को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं।
चार लोगों की गिरफ्तारी
हादसे के बाद पुलिस ने इमारत के मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रशासन का कहना है कि मामले में जिम्मेदार सभी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अधिकांश घायलों को मिली छुट्टी
आग की घटना में घायल हुए लोगों में से अधिकांश को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। शेष घायलों का इलाज जारी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भवन का नक्शा स्वीकृत था, लेकिन वास्तविक निर्माण स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप नहीं किया गया था। इस वजह से निर्माण प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मृतकों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये तथा घायलों को पचास-पचास हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को पचास-पचास हजार रुपये देने का ऐलान किया है।
पुराने दस्तावेजों की हो रही जांच
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, हादसे के बाद इमारत से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और लखनऊ विकास प्राधिकरण की पूर्व कार्रवाई की समीक्षा की जा रही है। वर्ष 2016 में जारी ध्वस्तीकरण आदेश और उसके बाद उसे निरस्त किए जाने की प्रक्रिया जांच के केंद्र में है।
अधिकारियों पर गिरी निलंबन की गाज
मुख्यमंत्री के निर्देश पर लापरवाही के आरोप में बिजली विभाग, अग्निशमन विभाग और लखनऊ विकास प्राधिकरण के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि जांच के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए चार लोगों में राम कृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषार कृष्ण जायसवाल और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं। इनमें उपाध्याय, शुक्ला और जायसवाल आग की चपेट में आई इमारत के संयुक्त मालिक बताए गए हैं।