
Indigenous BrahMos Missile: लखनऊ में शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश में निर्मित पहली ‘ब्रह्मोस’ सुपरसोनिक मिसाइलों की खेप का अनावरण किया और इसे भारतीय सेना को सौंपा। भारत-रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित यह मिसाइल अब पूरी तरह ‘मेड इन इंडिया’ बन चुकी है। समारोह के दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि “अब हमारे विरोधी जान लें कि ब्रह्मोस से बच पाना असंभव है।” उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सामरिक शक्ति को साबित कर दिया है और यह मिसाइल अब आत्मनिर्भर भारत की मिसाल बन चुकी है।
थल, जल और वायु
ब्रह्मोस मिसाइल आज भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना – तीनों का अहम हिस्सा बन चुकी है। थलसेना के पास चार ब्रह्मोस रेजिमेंट हैं, जबकि नौसेना के लगभग सभी प्रमुख युद्धपोत इस मिसाइल से लैस हैं। वहीं, वायुसेना के सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमान वायु-लॉन्च ब्रह्मोस के जरिए 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित लक्ष्यों पर सटीक वार करने में सक्षम हैं। हाल ही के ऑपरेशन सिंदूर में इस मिसाइल ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर अपनी शक्ति और सटीकता का प्रदर्शन किया था।
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लखनऊ से मिला आत्मनिर्भर भारत को नया आयाम
लखनऊ की ब्रह्मोस एयरोस्पेस इकाई भारत की पहली पूर्ण उत्पादन सुविधा है, जहां सालाना 80 से 100 मिसाइलों के निर्माण की क्षमता है। भविष्य में इसे 150 मिसाइलें प्रतिवर्ष बनाने का लक्ष्य रखा गया है। यहां बनी मिसाइलें न केवल भारतीय सेनाओं की जरूरतें पूरी करेंगी, बल्कि भविष्य में निर्यात के लिए भी रास्ता खोलेंगी। विशेषज्ञों के अनुसार, नई पीढ़ी की BrahMos-NG मिसाइल हल्की, तेज और स्टील्थ तकनीक से लैस होगी, जिसकी रेंज 500 किमी तक बढ़ाई जा सकती है। यह उपलब्धि इस बात का प्रतीक है कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक रक्षा निर्माता राष्ट्र बनकर उभर रहा है।